- Home
- Chhattisgarh
- परिचर्चा : ‘हिंदी साहित्य भारती’ दुर्ग इकाई के तत्वावधान में ‘वैश्विक परिदृश्य में हिंदी’ विषय पर परिचर्चा : मुख्य वक्ता थे- वरिष्ठ साहित्यकार अनिता करडेकर और बलदाऊ राम साहू
परिचर्चा : ‘हिंदी साहित्य भारती’ दुर्ग इकाई के तत्वावधान में ‘वैश्विक परिदृश्य में हिंदी’ विषय पर परिचर्चा : मुख्य वक्ता थे- वरिष्ठ साहित्यकार अनिता करडेकर और बलदाऊ राम साहू

👉 • बलदाऊ राम साहू ने कहा कि “माँ, मातृभूमि और मातृभाषा का कोई विकल्प नहीं होता. आज विश्व के 150 देशोँ में हिंदी भाषा का शिक्षण हो रहा है, लेकिन हम अंग्रेजी विषय में विकास की संभावना को तलाश रहे हैं. यह चिंता का विषय है. हम हिंदी का उपयोग अपने घर से ही प्रारंभ करें. हिंदी सिर्फ एक भाषा नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, सभ्यता और ज्ञान का वाहक भी है”
दुर्ग [छत्तीसगढ़ आसपास]
14 सितम्बर, 2025 को हिंदी साहित्य भारती, दुर्ग इकाई के तत्वाधान में “वैश्विक परिदृश्य में हिंदी” विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस परिचर्चा में मुख्य वक्ता के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती अनिता कार्डेकर, राष्ट्रीय राजभाषा सलाहकार सदस्य कृषि, पशुपालन व मत्स्यपाल मंत्रालय भारत सरकार व वरिष्ठ बाल साहित्यकार बलदाऊ राम साहू, राष्ट्रपति पुरुस्कार से सम्मानित शिक्षक बेनी राम वर्मा, चंद्रकांत साहू, युवराज सिंह, ध्रुवदास महंत, सापेश कुमार सर्वा, विक्रम सिंह सहित कई हिंदी साहित्य के साधक सम्मिलित हुए।
कार्यक्रम का आरंभ हिंदी साहित्य भारती के कुलगीत से हुआ। इसके पश्चात इस परिचर्चा में सम्मिलित साहित्यकारों ने हिंदी भाषा के प्रति अपने विचार व्यक्त किये। बेनी राम वर्मा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि हिंदी भाषा के विकास के लिए हमें अंग्रेजी के मोहजाल से निकलना होगा। सापेश कुमार सर्वा ने हिंदी आज वैश्विक व्यापार के लिए अनिवार्य हो गया है। इसलिए यह वैश्विक संपर्क की भाषा बनते जा रही है। विक्रम सिंह ने हिंदी भाषा को सामान्य व्यवहार व कार्यालयीन कार्यों में उपयोग करने पर बल दिया। व्याख्यता ध्रुवदास महंत ने विद्यालय स्तर पर गुणवत्तायुक्त भाषा शिक्षण पर बल दिया.
अनिता करडेकर ने कहा-वैश्विक परिदृश्य में हिंदी एक शक्तिशाली और तेजी से बढ़ती हुई भाषा है, जो विश्व स्तर पर तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा बन गई है और भारत की संपर्क भाषा व विश्वभाषा के रूप में उभर रही है.,
बलदाऊ राम साहू ने कहा कि माँ, मातृभूमि और मातृभाषा का कोई विकल्प नहीं होता। आज विश्व के एक सौ पचास देशों में हिंदी भाषा का शिक्षण हो रहा है। लेकिन हम अंग्रेजी विषय में विकास की संभावना तलाश रहे हैं। यह चिंता का विषय है। उन्होंने आगे कहा कि हम हिंदी के उपयोग अपने घर से ही प्रारंभ करें। हिंदी सिर्फ़ एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सभ्यता और ज्ञान का वाहक भी है.
कार्यक्रम का संचालन एवं आभार व्यक्त ‘हिंदी साहित्य भारती’ के मीडिया प्रभारी विक्रम सिंह ने किया.
🟥🟥🟥
chhattisgarhaaspaas
विज्ञापन (Advertisement)