- Home
- Chhattisgarh
- हिंदी-तेलगु में प्रकाशित द्वि-भाषी पत्रिका ‘भिलाई वाणी’ सम्मान समारोह : देश के सुपरिचित साहित्यकार गिरीश पंकज, समाजसेवी बलिवाड़ा रमेश और बांग्ला-हिंदी के सुप्रसिद्ध कवि व नाट्यकार प्रकाशचंद्र मण्डल को 2025 का ‘भिलाई वाणी सम्मान’ से सम्मानित किया जाएगा
हिंदी-तेलगु में प्रकाशित द्वि-भाषी पत्रिका ‘भिलाई वाणी’ सम्मान समारोह : देश के सुपरिचित साहित्यकार गिरीश पंकज, समाजसेवी बलिवाड़ा रमेश और बांग्ला-हिंदी के सुप्रसिद्ध कवि व नाट्यकार प्रकाशचंद्र मण्डल को 2025 का ‘भिलाई वाणी सम्मान’ से सम्मानित किया जाएगा

👉 [बाएँ से] गिरीश पंकज, बलिवाड़ा रमेश और प्रकाशचंद्र मण्डल
भिलाई [छत्तीसगढ़ आसपास]
प्रतिष्ठित ‘भिलाई वाणी सम्मान’ इस वर्ष-2025 का साहित्यकार गिरीश पंकज, समाज सेवा क्षेत्र के अग्रणी बलिवाड़ा रमेश एवं वरिष्ठ कवि व नाटककार प्रकाश चंद्र मंडल को दिया जा रहा है। यह सम्मान उनके साहित्यिक, सामाजिक व सांस्कृतिक योगदान को मान्यता देते हुए प्रदान किया जा रहा है।
गिरीश पंकज का साहित्यिक योगदान
देश के 100 महत्वपूर्ण लेखकों की सूची में दसवें स्थान पर शामिल किए गए गिरीश पंकज (पूरा नाम – गिरीशचंद्र उपाध्याय) व्यंग्य साहित्य में विशेष योगदान देने वाले विद्वान हैं। उनके व्यंग्य साहित्य पर पी-एच.डी. हेतु कुल 22 शोध एवम् लघुशोध कार्य संपन्न हो चुके हैं। वे ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार की हिंदी सलाहकार समिति के सदस्य हैं। इसके अतिरिक्त, साहित्य अकादमी, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास जैसे प्रतिष्ठित संस्थाओं के सदस्य रह चुके हैं।
उन्होंने 115 पुस्तकें प्रकाशित की हैं, जिनमें बच्चों के लिए 12 पुस्तकें शामिल हैं। इसके अलावा, ‘सद्भावना दर्पण’ पत्रिका के प्रकाशक एवं संपादक होने के साथ ही दैनिक अमृत संदेश व दैनिक समाचार पच्चीसा में स्तंभ लेखन भी करते हैं। छत्तीसगढ़ राष्ट्रभाषा प्रचार समिति एवं हरिजन सेवक संघ में भी समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
बलिवाड़ा रमेश का समाज सेवा क्षेत्र में योगदान
विश्व भारत ट्रस्ट, विशाखापट्टनम के चेयरमेन बलिवाड़ा रमेश ने ग्रामीण गांवों को गोद लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता सहित बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का कार्य निरंतर जारी रखा है। विशेष रूप से, उन्होंने 400 बच्चों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान की है।
तेलुगु भाषा एवं संस्कृति के संरक्षण व विकास के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित कर सामाजिक समृद्धि में योगदान दिया जा रहा है। हर वर्ष 15 अगस्त को स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिवारों को सम्मानित किया जाता है। इस पहल से गांवों के समग्र विकास में अहम भूमिका निभाई जा रही है।
प्रकाश चंद्र मंडल का साहित्यिक व नाट्य क्षेत्र में योगदान
प्रकाश चंद्र मंडल का साहित्यिक सफर वर्ष 1977 से प्रारंभ हुआ। उनके काव्य संग्रहों में ‘तुमि एले ताई’, ‘एक फालि रोद्दुर’, ‘शब्दों की खोज में’, ‘आमाके उन्मुक्त करो’, ‘फिर भी चलना होगा’ सहित अन्य पुस्तकें शामिल हैं।
नाट्य क्षेत्र में उन्होंने 36 नाटकों में अभिनय, निर्देशन एवं लेखन का कार्य किया है। उन्हें छत्तीसगढ़ धरतीपुत्र सम्मान, श्रेष्ठ नाट्य निर्देशन सम्मान, छत्तीसगढ़ मुक्ताकाश सम्मान (रायपुर), सर्वश्रेष्ठ नाट्य निर्देशन सम्मान (उत्कल नाट्य मंच, उड़ीसा), साहित्य में गुणीजन सम्मान (विश्व बंग साहित्य एवं सांस्कृतिक सम्मेलन, कोलकाता) सहित अनेक राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हैं।
ये जानकारी ‘भिलाई वाणी’ सम्मान के संयोजक एवं आयोजक एल. रुद्रमूर्ति ने ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ को दी.
🟥🟥🟥
chhattisgarhaaspaas
विज्ञापन (Advertisement)