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भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन से मांग : ‘भिलाई स्टील प्लांट शेड्यूल्ड ट्राइब एम्पलाईज वेलफेयर एसोसिएशन’ ने तत्काल प्रभाव से संवैधानिक मान्यता प्रदान करने की मांग एससी-एसटी संपर्क अधिकारी रोहित हरित से की

👉 • मांग पत्र देते हुए एसोसिएशन के पदाधिकारी
भिलाई [छत्तीसगढ़ आसपास]
भिलाई स्टील प्लांट शेड्यूल्ड ट्राइब एम्पलाईज वेलफेयर एसोसिएशन ने छत्तीसगढ़ सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1973 (संशोधित 1998) के तहत अपने आपको एक पंजीकृत संस्था के रूप में दर्ज कर लिया है। इस संगठन का कार्यक्षेत्र संपूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य है। पंजीयन प्रक्रिया में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के मार्गदर्शन और सहयोग प्राप्त संगठन को प्राप्त हुआ है। संगठन ने इस प्रक्रिया की जानकारी पूर्व में प्रबंधन को पत्र के माध्यम से दी थी। पंजीयन में देरी का कारण छत्तीसगढ़ सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1973 (संशोधित 1998) के नियमों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करना था।
तत्काल प्रभाव से प्रबंधन द्वारा संगठन मान्यता प्रदान करने की मांग
आज संगठन ने कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन), भिलाई स्टील प्लांट के नाम एक ज्ञापन पत्र एस.सी./एस.टी. संपर्क अधिकारी (Liaison Officer) श्री रोहित हरित के माध्यम से प्रस्तुत किया। इसमें संगठन के पंजीयन की जानकारी देते हुए तत्काल प्रभाव से मान्यता प्रदान करने की मांग की गई है। पत्र की प्रतिलिपि राष्ट्रपति महोदया, जनजातीय मंत्रालय, इस्पात मंत्रालय, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, सेल चेयरमैन, भिलाई स्टील प्लांट के निदेशक प्रभारी, और मुख्य महाप्रबंधक (मानव संसाधन) को हार्ड कॉपी और ईमेल के माध्यम से प्रेषित की गई है।
संगठन के उद्देश्य और मांगें
संगठन के अध्यक्ष श्री प्रदीप टोप्पो ने बताया कि 2004 में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के गठन के बाद भी, सेल/यूनिट स्तर पर अनुसूचित जनजाति (एस.टी.) कर्मचारियों के अधिकारों का हनन और उनकी समस्याओं की अनदेखी लगातार होती रही है। उन्होंने कहा, “हमें समान भागीदारी और विशेष प्रतिनिधित्व से जानबूझकर वंचित किया गया है। कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है, जिसके लिए संगठन प्रबंधन के सहयोग से शीघ्र समाधान की दिशा में कदम उठाएगा।”
स्वतंत्र संगठन की आवश्यकता
कार्यकारी अध्यक्ष श्री अजय कुमार ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने सेल/यूनिट स्तर पर एस.सी./एस.टी. कर्मचारियों के लिए एकल संगठन बनाने का कोई निर्देश नहीं दिया है। उन्होंने कहा, “संविधान में अनुसूचित जनजातियों के लिए विशेष प्रावधान हैं। इसलिए हमें स्वतंत्र रूप से अपने नेतृत्व में समस्याओं के समाधान और कल्याणकारी कार्यों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। संगठन का गठन हमारा मौलिक अधिकार है, और इसका उद्देश्य जनकल्याण से जुड़ा है।”
प्रबंधन से सकारात्मक सहयोग की अपेक्षा
महासचिव श्री श्याम सुंदर मुर्म ने प्रबंधन से सकारात्मक सहयोग की अपेक्षा जताते हुए कहा, “हमारी मांग है कि संगठन को तत्काल प्रभाव से मान्यता प्रदान की जाए और समानता के अधिकार का अनुपालन सुनिश्चित हो।”
कोषाध्यक्ष श्री भिमांशु कच्छप ने बताया कि हमारा संगठन एक गैर-लाभकारी संगठन है, जिसका उद्देश्य कर्मचारियों के कल्याण और अधिक से अधिक सदस्यों को जोड़ना है। उन्होंने कहा, “प्रबंधन के सहयोग से हम जागरूकता कार्यक्रम और अन्य कल्याणकारी गतिविधियों का आयोजन कर सकते हैं।”
एस.टी. कर्मचारियों के लिए एक मंच
संगठन सचिव श्री घनश्याम सिंह सिदार ने कहा, “यह संगठन भिलाई स्टील प्लांट और इसकी खदानों में कार्यरत कार्यपालक और गैर-कार्यपालक एस.टी. कर्मचारियों के लिए एक मंच है। कर्मचारी अपनी समस्याएं इस मंच पर रख सकते हैं, और संगठन उनके समाधान के लिए प्रतिबद्ध है।”
आगे की रणनीति
संगठन ने यह भी कहा है कि यदि उनकी उचित मांगें पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता है, तो वे अपने अधिकारों की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, जनजातीय मंत्रालय, और अन्य उचित मंचों का सहारा लेने के लिए बाध्य होंगे। संगठन ने जोर दिया कि अनुसूचित जनजाति समुदायों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए संवैधानिक प्रावधान और विशेष शक्तियां मौजूद हैं।
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