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नवरात्रि पर्व पर विशेष : नवरात्रि में माता चंद्रघंटा का दिवस सौंदर्य, साहस और शक्ति का प्रतीक – आलेख, भावना संजीव ठाकुर

हिंदू धर्म में नवरात्रि का पर्व शक्ति की नव स्वरूपों की आराधना के लिए मनाया जाता है। नवरात्रि का पवित्र तीसरा दिन माता चंद्रघंटा का दिवस को समर्पित होता है।देवी चंद्रघंटा को साहस, वीरता और करुणा की देवी माना जाता है। उनका नाम “चंद्रघंटा” इसलिए पड़ा क्योंकि उनके माथे पर अर्धचंद्राकार घंटी (चंद्र + घंटा) सजी होती है। यह घंटी उनके साहस और भक्तों की रक्षा करने की शक्ति का प्रतीक है।माता चंद्रघंटा का स्वरूप अत्यंत आकर्षक और दिव्य है। उनके दस हाथ होते हैं, जिनमें विभिन्न प्रकार के अस्त्र-शस्त्र और आशीर्वाद देने वाले हाथ शामिल हैं। वे घोड़े की सवारी करती हैं, जो साहस और गति का प्रतीक है। उनके चेहरे पर सौम्य मुस्कान और आंखों में करुणा झलकती है। उनका शरीर सुनहरे रंग का होता है और वे अपने भक्तों पर सदैव प्रसन्न नजर आती हैं।
माता चंद्रघंटा भक्तों को भय और बुराई से मुक्त करती हैं। उनका आध्यात्मिक स्वरूप भयमुक्ति, शक्ति और प्रेम का संदेश देता है। जो व्यक्ति उनका ध्यान करता है, उसे साहस, मानसिक शक्ति और कठिनाइयों का सामना करने की क्षमता मिलती है।
पूजा में सफेद या पीले रंग के फूल, दीपक, मिठाई और लाल कुमकुम का उपयोग किया जाता है।
भक्त चंद्रघंटा की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाकर, मंत्र “ॐ चंद्रघंटायै नमः” का जाप करते हैं।
इस दिन माता की कथा सुनना और उनके गुणों का स्मरण करना शुभ माना जाता है।माता चंद्रघंटा की आराधना से व्यक्ति में साहस, साहसिक निर्णय क्षमता और मानसिक स्थिरता आती है। वे संकट के समय शत्रुओं और बुराई से सुरक्षा करती हैं। इसके अलावा, उनकी भक्ति से मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है।
माता चंद्रघंटा न केवल शक्ति और साहस की प्रतीक हैं, बल्कि करुणा और प्रेम की देवी भी हैं। नवरात्रि के पहले दिन उनकी पूजा करने से न केवल भौतिक सुख और सुरक्षा मिलती है, बल्कि जीवन में मानसिक और आध्यात्मिक स्थिरता भी आती है। उनके आशीर्वाद से भक्तों का मन भयमुक्त होकर धर्म और भक्ति के मार्ग पर दृढ़ रहता है।
नवरात्रि में माता चंद्रघंटा का विधिवत पूजन- नवरात्रि हिन्दू धर्म का अत्यंत पावन पर्व है, जिसमें माता दुर्गा के नौ रूपों की आराधना की जाती है। इस अवसर पर माता चंद्रघंटा की पूजा होती है। उनके माथे पर अर्धचंद्राकार घंटी (चंद्र + घंटा) सजी होती है, जो शक्ति, साहस और भयमुक्ति का प्रतीक है।
माता चंद्रघंटा के पूजन से भक्तों का मन भयमुक्त होता है और जीवन में साहस, मानसिक शक्ति और सफलता आती है।
माता चंद्रघंटा का स्वरूप
दिव्य रूप: सुनहरे रंग का शरीर, दस हाथ, सौम्य मुस्कान, करुणा भरी आंखें।
सवारी: माता घोड़े पर सवार हैं।
हस्त उपकरण: त्रिशूल, गदा, कमल, शंख, और आशीर्वाद देने वाले हाथ।
संकट से मुक्ति: उनका रूप और घंटी बुराई और भय को दूर करती हैं।
पूजा सामग्री
माता का चित्र या मूर्ति
लाल और पीले फूल
दीपक और अगरबत्ती कुमकुम और हल्दी मिठाई, फल और नारियल
लाल वस्त्र (पूजन के लिए कपड़ा या आसन)
दिन-भर का पूजन क्रम;-
सुबह (प्रातःकाल)स्नान और स्वच्छता: सुबह उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
मंडप सजाना: माता के चित्र या मूर्ति को साफ स्थान पर लाल कपड़े पर स्थापित करें।
दीपक और अगरबत्ती: दीपक जलाएं और वातावरण को पवित्र बनाएं।मंत्र जाप: मंत्र: ॐ चंद्रघंटायै नमःजाप संख्या: 108 बार अभिषेक: जल, दूध, घी, दही और फूल से माता की प्रतिमा का अभिषेक करें।
फूल और प्रसाद अर्पण: देवी के चरणों में हल्दी, कुमकुम और लाल फूल अर्पित करें।
ध्यान और कथा पाठ: माता चंद्रघंटा की कथा पढ़ें या सुनें।
मंत्र जाप: कम से कम 21 बार ॐ चंद्रघंटायै नमः का उच्चारण करें।
भोजन प्रसाद: हल्का भोजन करें और माता को भोग अर्पित करें।दीप प्रज्वलन: शाम को पुनः दीपक जलाएं।
आरती: माता चंद्रघंटा की आरती करें। आरती गाते समय ध्यान रखें कि हृदय में केवल माता का ध्यान हो।
प्रसाद वितरण: पूजा के बाद फल और मिठाई प्रसाद के रूप में वितरित करें।माता की भक्ति में सत्य, संयम और अहिंसा का पालन करें ,नवरात्रि के पहले दिन से दैनिक मंत्र जाप और ध्यान करना शुभ माना जाता है।लाल और पीले रंग के वस्त्र और फूल इस दिन विशेष शुभ होते हैपूरे दिन शुद्धता का ध्यान रखें और नकारात्मक भावों से दूर रहें।माता चंद्रघंटा की पूजन से अनेक लाभ प्राप्त होते हैं जैसे भय और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति संकट और शत्रुओं से सुरक्षा,साहस, मानसिक स्थिरता और निर्णय शक्ति
आध्यात्मिक उन्नति और सुख-समृद्धि
धार्मिक और नैतिक मार्ग पर दृढ़ता
माता चंद्रघंटा शक्ति, साहस और करुणा की देवी हैं। उनके आशीर्वाद से जीवन में भय नहीं रहता और व्यक्ति धर्म, भक्ति और साहस के मार्ग पर दृढ़ता से चलता है।नवरात्रि मैं माता चंद्रघंटा का पूर्ण पूजन केवल भौतिक लाभ नहीं देता, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक उन्नति भी प्रदान करता है। उनके चरणों में समर्पण से जीवन में शांति, शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है।

[ • भावना संजीव ठाकुर
[ • रायपुर-छत्तीसगढ़
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chhattisgarhaaspaas
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