- Home
- Chhattisgarh
- वसुंधरा की वैचारिक संगोष्ठी : ‘भारतबोध, भारतीय और हिंदी पत्रकारिता’ पर दिग्गज पत्रकारों का संबोधन हुआ : इस अवसर पर भारतीय पत्रकारिता पर केंद्रित मासिक पत्रिका ‘कृति बहुमत’ तथा छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता-नींव के पत्थर पर एकाग्र ‘कृति वसुंधरा’ के विशेषांकों का लोकार्पण हुआ
वसुंधरा की वैचारिक संगोष्ठी : ‘भारतबोध, भारतीय और हिंदी पत्रकारिता’ पर दिग्गज पत्रकारों का संबोधन हुआ : इस अवसर पर भारतीय पत्रकारिता पर केंद्रित मासिक पत्रिका ‘कृति बहुमत’ तथा छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता-नींव के पत्थर पर एकाग्र ‘कृति वसुंधरा’ के विशेषांकों का लोकार्पण हुआ

भिलाई [‘छत्तीसगढ़ आसपास’ के लिए रिपोर्ट : डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’]
हिंदी पत्रकारिता की द्वि शताब्दी के पूर्ण होने के ऐतिहासिक अवसर पर लोकजागरण की संस्था वसुंधरा का महत्वपूर्ण आयोजन सम्पन्न हुआ. समारोह के मुख्य अतिथि स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव थे. ख्याति लब्ध पत्रकार, लेखक एवं संपादक अनंत विजय, (नई दिल्ली) भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली के पूर्व महानिदेशक डा. संजय द्विवेदी संगोष्ठी में मुख्य वक्ता बतौर मौजूद थे. छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा अतिथि वक्ता के तौर पर उपस्थित रहे. दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर, समाजसेवी अमित श्रीवास्तव, कुलपति प्रो संजय तिवारी भी मंच पर मौजूद रहे।
गजेंद्र यादव ने कहा कि-

👉 छत्तीसगढ़ शासन के मंत्री गजेंद्र यादव अपने उद्बोधन में बोले कि हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष का पूर्ण होना एक ऐतिहासिक घटना है. पत्रकारिता पर केंद्रित इस तरह के आयोजन हमारे प्रदेश में और भी होना चाहिए…
हिंदी पत्रकारिता के दो सौ वर्ष का पूर्ण होना एक ऐतिहासिक घटना है. इस दौरान पत्रकारिता ने लोकतंत्र को मजबूत करने में अपनी अहम भूमिका निभाई वहीं दूसरी तरफ शिक्षा, संस्कृति, ज्ञान आदि के प्रचार प्रसार में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की. श्री यादव ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता के इन दो सौ वर्षों के इतिहास में ऐसे अनेक पत्रकार हुए जिन्होंने देश में भारतीयता और राष्ट्रवाद को समृद्ध करने का कार्य किया. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देशहित, जनहित और राष्ट्रहित से ऊपर कुछ भी नहीं है. श्री यादव ने अपने ओजपूर्ण संबोधन में कहा कि इस तरह के आयोजनों से भारतबोध की भावना विकसित होती है. श्री यादव ने कहा कि हिंदू सनातन संस्कृति के साथ देश में अमृतकाल चल रहा है। पत्रकारिता पर केंद्रित इस तरह के और आयोजन हमारे प्रदेश में होना चाहिए.
अनंत विजय ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता का इतिहास अनेक उपलब्धियों से भरा हुआ है. देश सेवा, त्याग, तपस्या और समर्पण के अनेक उदाहरण दिए जा सकते हैं. उन्होंने कहा कि हिंदी पत्रकारिता का इतिहास कर्म के प्रति संघर्ष और उत्तरदायित्वों के निर्वहन के प्रति जिजीविषा के अनेक आयामों से भरा हुआ है. श्री विजय ने कहा कि पत्रकारिता का कार्य सदैव चुनौतीपूर्ण रहा है. इन चुनौतियों का सामना करते हुए अपने दायित्वों का निर्वहन करना ही भारतीयता की भावना का पोषक है. उन्होंने कहा कि अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करना ही देशसेवा है. इसी में भारतबोध और भारतीयता के सूत्र छिपे हुए हैं.
मुख्य वक्ता अनंत विजय ने इस अवसर पर बेहद तार्किक और सारगर्भित वक्तव्य दिया. उन्होंने इस बात को अत्यंत गहराई से विश्लेषित किया कि भारतबोध और भारतीयता का क्या महत्व है. हिंदी पत्रकारिता के परिप्रेक्ष्य में इस विषय पर विचार विमर्श क्यों आवश्यक है. उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब वैचारिक तौर पर राष्ट्रवाद के पक्ष में हमें मजबूती से खडे होकर अपनी भूमिका सुनिश्चित करनी चाहिए. अनंत विजय ने पत्रकारिता के प्रारंभिक काल से लेकर बाद के वर्षों तक के अनेक प्रसंगों का जिक्र किया और स्थापना दी कि हिंदी पत्रकारिता का मूल स्वर भारतबोध और भारतीयता का ही है. हमें इसी मूल स्वर को अपना लक्ष्य मानकर इसके उत्तर दायित्वों के प्रति सतर्क, सचेत और जागरूक होकर कार्य करना चाहिए.
पत्रकारिता संबंधी विषयों के प्रखर लेखक डॉ. संजय द्विवेदी ने
हिंदी पत्रकारिता में भारतीयता और भारतबोध की परम्परा के केंद्र में अनेक महत्वपूर्ण बातें कहीं. उन्होंने अत्यंत साफगोई से कहा कि भारतीयता और भारतबोध के केंद्रीय विचार के संदर्भ में हिंदी पत्रकारिता के दो सौ वर्षों के इतिहास का मूल्यांकन किया जाना चाहिए. उन्होंने अपने विषय को स्पष्ट करते हुए पत्रकारिता के इतिहास के अनेक उद्धरण दिए और प्रतिपादित किया कि विभिन्न कालखंडों में भारतीयता का स्वर ही पत्रकारिता की आत्मा रही है. डा. द्विवेदी ने समकालीन पत्रकारिता की अनेक चुनौतियों और विसंगतियों पर भी अपनी बेबाक राय रखी.अतिथि वक्ता शशांक शर्मा ने भी इस अवसर पर अत्यंत महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किए.
समारोह में अतिथियों ने भारतीय पत्रकारिता पर केंद्रित मासिक पत्रिका कृति बहुमत तथा छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता,:नींव के पत्थर पर एकाग्र कृति बहुमत के विशेषांकों का लोकार्पण किया.
प्रारंभ में आयोजकीय वक्तव्य विनोद मिश्र ने दिया. लोक गायिका रजनी रजक ने छत्तीसगढ़ राज्यगीत एवं डॉ. सोनाली चक्रवर्ती ने वंदेमातरम् गीत की प्रस्तुति दी. संचालन विश्वेश ठाकरे और श्वेता उपाध्याय ने किया.
अतिथियों का स्वागत दिनेश बाजपेयी, सोनू राम सिंह, नरेंद्र कुमार बंछोर, अश्विनी नागले, डॉ. सुनीता वर्मा, डॉ. अनिता सांवत, प्रो. डीएन शर्मा, ईवी मुरली, अंकुर मिश्रा, अरविंद मिश्रा, वीरेंद्रनाथ पाण्डेय, सुमन कन्नोजे, अरविंद पाण्डेय और श्रद्धा पुरेंद्र साहू ने किया.
इस अवसर पर उपस्थित प्रमुख प्रबुद्धजन-
रमशीला साहू, इंद्रजीत सिंह छोटू, ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ के जिला ब्यूरो प्रमुख डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, पुनीत चौबे, कथाकार लोकबाबू, विजय वर्तमान, ‘कला परंपरा’ के संपादक डॉ. डीपी देशमुख, कमलेश चंद्राकर, डॉ. संजय दानी, परविंदर सिंह ग्रेवाल, यशवंत साहू, राम कुमार वर्मा, निर्मल साहू, मयंक चतुर्वेदी, यशवंत धोटे, कोमल धनेसर, अरुण मिश्रा, मिथिलेश ठाकुर, संगीता मिश्रा, योगेश कुमार, अनुभूति ठाकुर.
[ • रपट, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’ ]
🟥🟥🟥
chhattisgarhaaspaas
विज्ञापन (Advertisement)