- Home
- Chhattisgarh
- राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की 150 वीं वर्षगांठ पर स्मरणोत्सव विशेष आड्डा-101 : ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा-101 में शामिल हुए साहित्य मनीषी ‘आड्डाबाज़’- स्मृति दत्त, दुलाल समाद्दार, गोविंद पाल, प्रकाशचंद्र मण्डल, प्रदीप भट्टाचार्य, बृजेश मल्लिक, जीबोन हालदार, विपुल सेन, सुजॉशा सेन, पं. बासुदेव भट्टाचार्य, सुबीर रॉय, रविंद्रनाथ देबनाथ और एसके भट्टाचार्य.
राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की 150 वीं वर्षगांठ पर स्मरणोत्सव विशेष आड्डा-101 : ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा-101 में शामिल हुए साहित्य मनीषी ‘आड्डाबाज़’- स्मृति दत्त, दुलाल समाद्दार, गोविंद पाल, प्रकाशचंद्र मण्डल, प्रदीप भट्टाचार्य, बृजेश मल्लिक, जीबोन हालदार, विपुल सेन, सुजॉशा सेन, पं. बासुदेव भट्टाचार्य, सुबीर रॉय, रविंद्रनाथ देबनाथ और एसके भट्टाचार्य.

👉 [चित्र-1, बाएँ से] सुबीर रॉय, प्रदीप भट्टाचार्य, रविंद्रनाथ देबनाथ, बृजेश मल्लिक, प्रकाशचंद्र मण्डल, जीबोन हालदार, स्मृति दत्त, सुजॉशा सेन, पं. बासुदेव भट्टाचार्य, गोविंद पाल, विपुल सेन और एसके भट्टाचार्य.
👉 [चित्र-2, बाएँ से] प्रदीप भट्टाचार्य, दुलाल समाद्दार, रविंद्रनाथ देबनाथ, बृजेश मल्लिक, प्रकाशचंद्र मण्डल, जीबोन हालदार, स्मृति दत्त, सुजॉशा सेन, पं. बासुदेव भट्टाचार्य, गोविंद पाल, विपुल सेन और एसके भट्टाचार्य.
भिलाई [भिलाई निवास, इंडियन कॉफी हाउस]
भिलाई : 08 नवम्बर, 2025 : भारत ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में एक वर्ष तक मनाए जाने वाले स्मरणोत्सव की शुरूआत की. ‘बंगीय साहित्य संस्था’ ने भी बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित सात नवंबर 1875 ‘वंदे मातरम्’ पर ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा-101’ में संस्था की उप सभापति व ख्यातिलब्ध लेखिका, कवयित्री श्रीमती स्मृति दत्त की अध्यक्षता एवं संस्था मुखपत्र बांग्ला लिटिल मेग्ज़िन ‘मध्यबलय’ के संपादक व विचारशील गंभीर कवि दुलाल समाद्दार के विशिष्ट अतिथि की उपस्थिति में आज की बैठक सम्पन्न हुई.
आज की बैठक में शामिल हुए- ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के उपदेष्टा कवि गोविंद पाल, संस्था के उप सचिव कवि प्रकाशचंद्र मण्डल, प्रगतिशील कवि व ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ के संपादक प्रदीप भट्टाचार्य, राष्ट्रवादी कवि बृजेश मल्लिक, हिंदुत्ववादी कवि पं. बासुदेव भट्टाचार्य, सुपरिचित बांग्ला कवि जीबोन हालदार, विपुल सेन, बांग्ला कवयित्री-गायिका सुजॉशा सेन, संगीतज्ञ संस्था ‘सुरो-ओ-बानी’ के संयोजक व समाजसेवी सुबीर रॉय, साहित्यिक चिंतक श्रोता रविंद्रनाथ देबनाथ और एसके भट्टाचार्य.
वंदे मातरम्, वंदे मातरम्! सुजलाम, सुफलाम्, मलयज शीतलाम्, शस्यश्यामलाम्, मातरम्! वंदे मातरम्! शुभ्रज्योत् सनाम्, पुलकितयामिनीम्, फुल्लकुसुमित दुमदल शोभिनीम्, सुहासिनीम् सुमधुर भाषिणीम्, सुखदाम् वरदाम्,मातरम्! वंदे मातरम्, वंदे मातरम्!! का स्मरण करते हुए स्मृति दत्त ने कहा कि 7 नवम्बर, 1875 को बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने इस राष्ट्रगीत को रचा था. आज इस राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 साल पूरे हुए. यह सिर्फ गीत नहीं, राष्ट्र की पहचान और शाश्वत प्रतीक भी हैं. उन्होंने कहा ‘वंदे मातरम्’ पहली बार साहित्यिक पत्रिका ‘बंगदर्शन’ में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास ‘आनंद मठ’ के एक भाग के रूप में प्रकाशित हुआ था. संविधान लागू होने के बाद 1950 में इस गीत को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया गया. वंदे मातरम् स्वदेशी आंदोलन का प्रमुख नारा बना और बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, भगत सिंह और सुभाषचंद्र बोस जैसे क्रांतिकारियों का प्रेरणा स्रोत रहा. 1947 में प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 1950 में ‘वंदे मातरम्’ ‘जन गण मन’ को राष्ट्रगीत व राष्ट्रगान के रूप में मान्यता दी. सुजलाम सुफलाम्,जुबां पर वंदे मातरम्

प्रदीप भट्टाचार्य ने अपनी बात रखते हुए बोले कि हम ऐसा सृजन करें, जिससे समाज में नफ़रत न फैले. जातिवाद और धर्म पर कोई कविता ना लिखें. हमें ऐसी रचना लिखनी चाहिए, जिसमें घर-परिवार, पड़ोस से लेकर देश-परदेश सांस ले सके.
▪️
इस अवसर पर कविता पाठ हुआ, जिसका संचालन प्रकाशचंद्र मण्डल ने किया-
• पं. बासुदेव भट्टाचार्य ने सुदीप चट्टोपाध्याय के संपादन में प्रकाशित ‘नव कलेवर’ में उनकी छोटी कविता ‘आबॉल-ताबोल’/ • सुजॉशा सेन ने ‘गान होले असीम समुद्र…’ और अपनी माँ की डायरी में लिखी कुछ प्रेम चिट्ठी को पढ़कर सुनाई/ • विपुल सेन ने कविता ‘पृथ्वी-र-महिमा’/ • जीबोन हालदार ने आज के संदर्भ में लिखी कविता ‘मोबाइल गुण-दोष’/ • गोविंद पाल ने ‘ऐटूकु चाई’ और ‘स्वप्न देखा’/ • दुलाल समाद्दार ने ‘छाल रे…’ और तारापद रॉय की कविता ‘शक्ति चटर्जी आई…’/ • प्रकाशचंद्र मण्डल ने ‘ऐटा मेने नियो…’ और ‘आड्डाबाज़’/ • बृजेश मल्लिक ने ‘सोनार बांग्ला’ और • एसके भट्टाचार्य ने हिंदी में दो कविता ‘अंतर्मन का कमरा’ और ‘डायरी के पन्ने’.
आभार व्यक्त सुबीर रॉय ने किया.
▪️
आड्डा-101 कुछ सचित्र झलकियाँ-

👉 [चित्र-1] सुबीर रॉय को सम्मान करते हुए [बाएँ से] प्रदीप भट्टाचार्य, बृजेश मल्लिक, प्रकाशचंद्र मण्डल, स्मृति दत्त, विपुल सेन, सुबीर रॉय और गोविंद पाल.
👉 [चित्र-2] गोविंद पाल को सम्मान प्रदान करते हुए [बाएँ से] प्रदीप भट्टाचार्य, बृजेश मल्लिक, प्रकाशचंद्र मण्डल, स्मृति दत्त, विपुल सेन, दुलाल समाद्दार और गोविंद पाल.

👉 पं. बासुदेव भट्टाचार्य को सम्मानित करते हुए [बाएँ से] स्मृति दत्त, दुलाल समाद्दार और पं. बासुदेव भट्टाचार्य.

👉 ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की उप सभापति स्मृति दत्त को सम्मान पत्र और मोमेंटो दिया गया संस्था की तरफ से.
[ • प्रस्तुति व रिपोर्ट : प्रदीप भट्टाचार्य ]
🟥🟥🟥🟥🟥
chhattisgarhaaspaas
विज्ञापन (Advertisement)