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‘साकेत साहित्य परिषद्’ सुरगी एवं ‘साहित्य प्रवाह समिति’ डोगरगढ़ का संयुक्त दीपावली मिलन सम्पन्न : डोगरगढ़ की साहित्यिक यात्रा पर सार्थक विचार-विमर्श चर्चा हुई और कविता पाठ

छत्तीसगढ़ : डोंगरगढ़ [छत्तीसगढ़ आसपास]
आदिवासी गोंडवाना भवन अछोली में साकेत साहित्य परिषद सुरगी एवं साहित्य प्रवाह समिति डोंगरगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में दीपावली मिलन समारोह , वैचारिक संगोष्ठी एवं काव्य पाठ का आयोजन किया गया। गोष्ठी का संयोजन साहित्यकार अमृत दास साहू, मदन मंडावी एवं राजेन्द्र कुमार साहू ने किया।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सुभदा मिश्रा वरिष्ठ साहित्यकार डोंगरगढ़ उपस्थित थी एवं अध्यक्षता तजिंदर सिंह भाटिया अध्यक्ष साहित्य प्रवाह समिति डोंगरगढ़ ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में श्रीमती किरण मिश्रा, प्राचार्य, शासकीय हाई स्कूल सेंदरी ,प्रभात तिवारी, अध्यक्ष, प्रगतिशील लेखक संघ राजनांदगांव, अरविंद कुमार लाल, प्रमुख सलाहकार,पुरवाही साहित्य समिति पाटेकोहरा, छुरिया , राम कुमार चंद्रवंशी, संगठन सचिव,पुरवाही साहित्य समिति पाटेकोहरा छुरिया, भीषम ठाकुर जिलाध्यक्ष, पटवारी संघ विशिष्ट वक्ता के रूप में रामनाथ भैंसार पूर्व विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी डोंगरगढ़,ओमप्रकाश साहू अंकुर अध्यक्ष, साकेत साहित्य परिषद सुरगी, राजनांदगांव, लखन लाल साहू लहर पूर्व अध्यक्ष साकेत साहित्य परिषद सुरगी, राजनांदगांव उपस्थित थे।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सुभदा मिश्रा वरिष्ठ साहित्यकार डोंगरगढ ने धर्म नगरी डोंगरगढ़ की साहित्यिक विकास यात्रा पर चर्चा करते हुए कहा कि जब सन 2002 में साहित्य मंच का गठन हुआ तो उसका नाम “नागरिक विकास मंच” ही रखा गया। मुझको ही अध्यक्ष बनाया गया।वीदित हो कि यहां इस नाम से संस्था पहले से ही संचालित थी। फिर डोंगरगढ़ में पाठक मंच भी गठित हो गया और इसका भी अध्यक्ष मुझे ही बना दिया गया। उन्होंने आगे कहा कि यहां एक बार राज्य स्तरीय कवि सम्मेलन भी हुआ। इस प्रकार धर्म नगरी डोंगरगढ़ में साहित्यिक वातावरण परवान चढ़ने लगा। मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन होने लगा जिसमें एक निश्चित किताब की समीक्षा भी किया जाता था। वरिष्ठ साहित्यकार हरजिंदर सिंह आजाद साहित्य मंच के लंबे समय तक सचिव रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे तजिंदर सिंह भाटिया, अध्यक्ष, साहित्य प्रवाह समिति डोंगरगढ़ ने कहा कि वे जब बड़े भैया साहित्यकार गुलबीर सिंह भाटिया के साथ दुर्ग में रहते थे तो वहां के साहित्यकारों डा. बलदाऊ राम साहू, रवि श्रीवास्तव, मुकुंद कौशल के संपर्क में आए और उन लोगों से ही मुझे पता चला कि डोंगरगढ़ में सुभदा मिश्रा रहती है जिनकी कहानियां सारिका एवं अन्य चर्चित साहित्यिक पत्रिका में प्रकाशित होती रहती है।फिर सुभदा दीदी से मिलना हुआ। यहां अन्य साहित्यकारों से मिल कर साहित्य समिति गठन का मार्ग प्रशस्त हो गया। उन्होंने स्कूली एवं कालेज जीवन के दौर के साहित्यिक वातावरण बनने की प्रक्रिया का भी जिक्र किया। भाटिया ने स्व. किशोर कुमार मिश्रा जी के पिता जी का भी जिक्र किया जो नेहरू कालेज में प्राध्यापक थे। उन्होंने अपने बिछुड़े साहित्यिक साथियों स्व. दशरथ
निषाद, स्व. नंद किशोर गुप्ता, स्व. विजय गुप्ता, स्व. किशोर कुमार मिश्रा, स्व. लेख राम वर्मा के योगदान को रेखांकित कर सादर नमन किया।
डोंगरगढ़ की साहित्यिक विकास
यात्रा पर आधार वक्तव्य ओमप्रकाश साहू अंकुर अध्यक्ष, साकेत साहित्य परिषद सुरगी एवं संयोजक पुरवाही साहित्य समिति पाटेकोहरा, छुरिया ने दिया। अंकुर ने कहा कि धर्म नगरी डोंगरगढ़ में साहित्यिक विकास यात्रा बहुत ही समृद्ध रहा है।सन 1982 में यहां प्रगतिशील लेखक संघ का एक वृहद सम्मेलन हुआ था जिसमें जिले एवं मध्यप्रदेश के वरिष्ठ साहित्यकार उपस्थित हुए थे। बाद में इप्टा का आयोजन भी हुआ।उन्होंने कहा कि डोंगरगढ़ साहित्य मंच (2002) के माध्यम से यहां की साहित्यिक वातावरण को संबल मिला। बीच के दौर में यहां साहित्यिक वातावरण सुप्त अवस्था में भी रही। लेकिन सन 2015 में जब साकेत साहित्य परिषद सुरगी के बैनर तले छुरिया ब्लाक के पाटेकोहरा में मासिक काव्य गोष्ठी एवं परिचर्चा का आयोजन किया गया। इसमें साकेत साहित्य परिषद सुरगी के सदस्यों के साथ ही डोंगरगढ़ ब्लाक एवं छुरिया ब्लाक के साहित्यकारों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। पाटेकोहरा में आयोजित साकेत के इस आयोजन ने छुरिया अंचल के साथ ही डोंगरगढ़ के साहित्यकारों को फिर से सक्रिय होने को प्रेरित कर दिया। छुरिया ब्लाक के साहित्यकारों ने संगठित होकर 28 फरवरी 2016 को पुरवाही साहित्य समिति पाटेकोहरा, छुरिया का गठन किया वहीं सन 2017 में डोंगरगढ़ में साहित्य प्रवाह समिति का गठन हुआ और फिर से यहां बढ़िया साहित्यिक वातावरण बना। उन्होंने कहा कि यहां के साहित्यकारों से मिल कर काम करने का एक सुखद अनुभव रहा है। विभिन्न कवि गोष्ठी एवं कवि सम्मेलन के माध्यम से यहां के साहित्यकारों के साथ बहुत ही आत्मीय संबंध रहा है।
अंकुर ने राष्ट्रपति पुरस्कृत शिक्षक लेख राम वर्मा को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वे बहुत ही सरल,सहज एवं सरस व्यक्तित्व के धनी थे। एक अच्छे कवि एवं कुशल वक्ता थे। लखन लाल साहू लहर पूर्व अध्यक्ष साकेत साहित्य परिषद सुरगी, राजनांदगांव ने कहा कि डोंगरगढ़ में साहित्यिक वातावरण बहुत ही समृद्ध रहा है। मुझे कई बार यहां की गोष्ठियों एवं कवि सम्मेलन में आने का सुअवसर मिला है ।यहां के साहित्यकारों से एक अलग ही लगाव रहा है। उन्होने स्व. लेखराम वर्मा को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वे शिक्षा, समाज एवं साहित्य तीनों क्षेत्र में अपनी एक अलग छाप छोड़ी। पूर्व बीईओ रामनाथ भैंसारे ने कहा कि वे साहित्यकार नहीं है लेकिन साहित्य रसिक होने के नाते साहित्यकारों से जुड़ा हुआ है और मुझे आत्मिक शांति मिलती है और इस क्षेत्र में मेरे परम सहयोगी स्व. लेख राम वर्मा ही रहे हैं जिनके माध्यम से मैं साहित्यकारों से जुड़ पाया हूं। किरण मिश्रा प्राचार्य शासकीय हाई स्कूल सेंदरी ने कहा कि डोंगरगढ़ की साहित्यिक विकास यात्रा को जान कर बहुत गौरवान्वित महसूस कर रही हूं। उन्होंने स्व. लेख राम वर्मा को एक कर्मठ शिक्षक एवं बेहतरीन इंसान बताते हुए कहा कि वे बहुत ही शालीन व्यक्ति थे। एक स्काउट मास्टर के रूप में सेंदरी हाईस्कूल के अनेकों बच्चों को राज्यपाल पुरस्कार दिलाने में महती भूमिका निभाई। वरिष्ठ साहित्यकार अरविंद कुमार लाल चिचोला ने स्व. लेख राम वर्मा को गीतों भरी श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में स्व. लेखराम वर्मा की धर्मपत्नी को शाल एवं श्रीफल भेंट किया गया।परिचर्चा का संचालन मदन मंडावी एवं आभार व्यक्त अमृत दास साहू ने किया।
परिचर्चा के बाद हास्य कवि भूखन वर्मा के सरस संचालन में काव्य पाठ का दौर चला। इसकी अध्यक्षता प्रभात तिवारी अध्यक्ष प्रगतिशील लेखक संघ राजनांदगांव ने की। काव्य पाठ एवं विचार व्यक्त करने वालों में अरविंद कुमार लाल, संजय तिवारी, अलख राम यादव,राम कुमार चंद्रवंशी, प्रभात तिवारी पुरवाही साहित्य समित पाटेकोहरा छुरिया के सचिव हेम लाल सहारे,बेदराम पटेल, साकेत साहित्य परिषद सुरगी के उपाध्यक्ष पवन यादव पहुना, नंद किशोर साव नीरव, गुलशन बालाघाटी, गुणवंत भीवगड़े, पूर्व अध्यक्ष, साहित्य प्रवाह समिति डोंगरगढ़, साकेत साहित्य परिषद सुरगी के सहसचिव डोहर दास साहू, भूखन वर्मा,शैल शर्मा , सुजाता साहू, प्रभा श्रीवास्तव, मनोहर लाल साहू,भूखन वर्मा, अमृत दास साहू,मदन मंडावी, लखन लाल साहू लहर,ओमप्रकाश साहू अंकुर,लीलाधर सिन्हा, भीषम ठाकुर ,अमिताभ दुफारे, खिलावन निर्मलकर,अनिता श्रीवास्तव, किरण नरेडी, गोपाल लाल वर्मा, महावीर साहू, हरी राम सिन्हा शामिल रहे।

कार्यक्रम का संचालन संयुक्त रूप से मदन मंडावी, भूखन वर्मा एवं आभार व्यक्त अमृत दास साहू ने किया.
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