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‘आड्डाबाज़-102’ : बंगीय साहित्य संस्था के तत्वावधान में ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा-102’ में शामिल हुए- बानी चक्रवर्ती, दुलाल समाद्दार, प्रकाशचंद्र मण्डल, पल्लव चटर्जी, वीरेंद्र नाथ सरकार, प्रदीप भट्टाचार्य, जीबोन हालदार, विपुल सेन, सुजॉशा सेन, पं. बासुदेव भट्टाचार्य, ब्रजेश मल्लिक और आलोक कुमार चंदा : बानी चक्रवर्ती एवं पल्लव चटर्जी का जन्मोत्सव मनाया गया : साहित्यिक चर्चा, काव्य पाठ

👉 • ‘आड्डाबाज़-102’ में ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के बंगीय सदस्य
भिलाई [‘छत्तीसगढ़ आसपास’ : भिलाई निवास, इंडियन कॉफी हाउस से प्रस्तुति रिपोर्ट प्रदीप भट्टाचार्य, फोटो क्लिक पल्लव चटर्जी]

👉 [बाएँ से] • पल्लव चटर्जी, विपुल सेन, वीरेंद्रनाथ सरकार, प्रकाशचंद्र मण्डल, आलोक कुमार चंदा, सुजॉशा सेन, बानी चक्रवर्ती, जीबोन हालदार, ब्रजेश मल्लिक, प्रदीप भट्टाचार्य और पं. बासुदेव भट्टाचार्य [फोटो क्लिक- दुलाल समाद्दार]
‘बंगीय साहित्य संस्था’ साल भर अनेकों साहित्यिक आयोजन विगत 65 वर्षों से निरंतर करते आ रही है. संस्था द्वारा प्रति सप्ताह ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा’ का बीते शनिवार [15 नवम्बर, 2025] को 102 कड़ी हो चुकी है. बांग्ला भाषा के उन्ननय, संस्कृति एवं सांस्कृतिक विरासत को छत्तीसगढ़ राज्य में बनाए रखने के लिए इस संस्था का गठन भाषाविद् व बांग्ला लेखक कवि स्व. शिबव्रत देवांजी, डॉ. भवानी प्रसाद मुखर्जी ने किया था. वर्तमान में इस संस्था की सभापति देश की लब्धप्रतिष्टित कवयित्री श्रीमती बानी चक्रवर्ती हैं. बांग्ला भाषा में प्रकाशित एक साहित्यिक पत्रिका ‘मध्यबलय’ संस्था के सौजन्य से कई वर्षों से किया जा रहा है. वर्तमान में इस लिटिल मेंगजिंन के संपादक कवि दुलाल समाद्दार हैं.
‘आड्डाबाज़’- 102 में शामिल हुए- ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की सभापति बानी चक्रवर्ती, ‘मध्यबलय’ के संपादक दुलाल समाद्दार, संस्था के उप सचिव प्रकाशचंद्र मण्डल, कवि पल्लव चटर्जी, वीरेंद्रनाथ सरकार, प्रगतिशील कवि प्रदीप भट्टाचार्य, बांग्ला कवि विपुल सेन, जीबोन हालदार, सुजॉशा सेन, हिंदुत्ववादी कवि पं. बासुदेव भट्टाचार्य, राष्ट्रवादी कवि ब्रजेश मल्लिक और भाषावादी चिंतक आलोक कुमार चंदा.
आज ‘आड्डाबाज़-102’ में संस्था की सभापति श्रीमती बानी चक्रवर्ती एवं संस्था के कोषाध्यक्ष व बांग्ला कवि पल्लव चटर्जी का जन्मोत्सव मनाया गया. संस्था के सदस्यों ने केक काटकर दोनों का जन्मदिन हर्षोल्लास के साथ मनाया.


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काव्य पाठ : विचार-विमर्श
• पं. बासुदेव भट्टाचार्य ने संस्मरण/ • जीबोन हालदार ने एकोख समोय कॉथाय गेलो…/ • विपुल सेन ने बानी चक्रवर्ती एवं पल्लव चटर्जी के जन्मदिन पर समर्पित कविता का पाठ किया. शीर्षक था- ‘शरण छंदों’ एवं ‘कबितार पांखा’/ • सुजॉशा सेन ने कवि मणीन्द्र रॉय की एक चिट्ठी-कविता को पढ़कर सुनाई/ • बानी चक्रवर्ती ने छोटी-छोटी सारगर्भित भावपूर्ण कविता को पढ़ी. शीर्षक था- ‘तृष्णा’, ‘निकटत्तम दुरुत्व’, ‘समोय’/ • प्रकाशचंद्र मण्डल ने संपादक डॉ. सुनिदिता कुंडू के संपादन में प्रकाशित पत्रिका ‘बैशाखी वार्ता’ में अपनी लिखी कविता ‘नयननीर’ का पाठ किया/ • ब्रजेश मल्लिक ने बांग्ला में कविता ‘अपूर्ण प्रेम गीत’ और हिंदी में कविता ‘भाई-बहन का प्यार’/ • वीरेंद्रनाथ सरकार ने ‘टू स्लीप’ एवं ‘तोबु आमी भेषे उठी…’/ • पल्लव चटर्जी ने छोटी-छोटी गंभीर कविता ‘बृष्टि’ [बरसात] और ‘चिना जाय ना [पहचान में नहीं आता]/ • आलोक कुमार चंदा ने पल्लव चटर्जी की प्रकाशित कविता ‘सोपनेर आलापन’ और मौसमी घोष की कविता ‘फूल फूटेछे… और • प्रदीप भट्टाचार्य ने मुक्तक रचना को पढ़ा.
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‘आड्डाबाज़-102’ की कुछ और प्रमुख सचित्र झलकियाँ-

👉 हम हैं साहित्यिक आड्डाबाज़’ [चित्र में बाएँ से] • ब्रजेश मल्लिक, प्रदीप भट्टाचार्य, पल्लव चटर्जी, विपुल सेन, जीबोन हालदार और दुलाल समाद्दार

👉 [बाएँ से] • प्रकाशचंद्र मण्डल, बानी चक्रवर्ती, आलोक कुमार चंदा और दुलाल समाद्दार.

👉 [चित्र-1 में बाएँ से] • पल्लव चटर्जी, वीरेंद्रनाथ सरकार और ब्रजेश मल्लिक.
👉 [चित्र-2 में बाएँ से] • आलोक कुमार चंदा, ब्रजेश मल्लिक, प्रकाशचंद्र मण्डल और प्रदीप भट्टाचार्य.
‘आड्डाबाज़-102’ की अध्यक्षता श्रीमती बानी चक्रवर्ती, संचालन प्रकाशचंद्र मण्डल और आभार व्यक्त श्रीमती सुजॉशा सेन ने किया.
[ • प्रस्तुति एवं रिपोर्ट : प्रदीप भट्टाचार्य ]
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