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- बांग्ला भाषा में प्रकाशित देशव्यापी चर्चित पत्रिका ‘मध्यबलय’ अंक-60 में प्रगतिशील कवि व साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ के अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य की अनुवाद कविता प्रकाशित : बांग्ला में अनुवाद, कवि तारकनाथ चौधुरी ने किया है : ‘मध्यबलय’ के संपादक हैं दुलाल समाद्दार.
बांग्ला भाषा में प्रकाशित देशव्यापी चर्चित पत्रिका ‘मध्यबलय’ अंक-60 में प्रगतिशील कवि व साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ के अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य की अनुवाद कविता प्रकाशित : बांग्ला में अनुवाद, कवि तारकनाथ चौधुरी ने किया है : ‘मध्यबलय’ के संपादक हैं दुलाल समाद्दार.

छत्तीसगढ़ आसपास साहित्यिक डेस्क :
विगत 65 वर्षों से संचालित ‘बंगीय साहित्य संस्था’ का मुखपत्र है- ‘मध्यबलय’. बांग्ला भाषा में प्रकाशित ‘मध्यबलय’ के संपादक हैं, बांग्ला के सुप्रसिद्ध कवि दुलाल समाद्दार. इस पत्रिका और इनके संपादक को अनेकों बार सम्मान प्राप्त हो चुका है. छत्तीसगढ़ [भिलाई] से ‘मध्यबलय’ लिटिल मेंगजिंन नियमित रूप से प्रकाशित होती है.
प्रदीप भट्टाचार्य हिंदी पत्रकारिता में एक जाना-पहचाना नाम है. इनके संपादन में लोक शिक्षण-लोक जागरण की मासिक पत्रिका ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ विगत 18 वर्षों से नियमित प्रकाशित हो रही है. बाल कवि के रूप में भी वे जाने जाते हैं. प्रगतिशील विचारक हैं. विगत दिनों इनके नेतृत्व में प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ का गठन किया गया, जिसके वे अंतरिम अध्यक्ष बनाए गए.

‘मध्यबलय-60’ में प्रदीप भट्टाचार्य की छोटी-छोटी कविताएं बांग्ला में अनुवादित कर प्रकाशित की गई है. हिंदी से बांग्ला में अनुवाद प्रगतिशील परंपरा के कवि तारकनाथ चौधुरी ने की है. पूर्व में भी इनकी कविताएं ‘मध्यबलय’ में छप चुकी हैं.
कुछ लोग इतिहास पढ़ते नहीं/कुछ लोग इतिहास पढ़ते हैं, लेकिन समझते नहीं/कुछ लोग इतिहास पढ़ते भी हैं, इतिहास समझते भी हैं/व अपने पौरुष से इतिहास गढ़ते भी हैं.
वे अपने ही इतिहास पर/साध रहे हैं निशाना/जिन्हें नहीं आता है/इतिहास को बनाना?
इतिहास भी/अपने इतिहास पर/रो रहा है/यह देख कर कि/क्या से क्या हो रहा है?
ऐसे ही प्रगतिशील परंपरा से समकालीन कविता को जोड़ती हुई प्रदीप भट्टाचार्य की कुछ रचनाएं ‘मध्यबलय’ अंक- 60 में प्रकाशित की गई है.

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