- Home
- Chhattisgarh
- ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में साहित्य सभा-353 : आयोजन संस्था की उप सभापति स्मृति दत्त के निवास में उनके नाती अभिषेक दत्त और आनंद रॉय की विशेष उपलब्धि पर आयोजित था : बांग्ला में काव्य पाठ, गीत-संगीत और साहित्यिक चर्चा
‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में साहित्य सभा-353 : आयोजन संस्था की उप सभापति स्मृति दत्त के निवास में उनके नाती अभिषेक दत्त और आनंद रॉय की विशेष उपलब्धि पर आयोजित था : बांग्ला में काव्य पाठ, गीत-संगीत और साहित्यिक चर्चा

👉 [बाएँ से] • अभिषेक दत्त, स्मृति दत्त और आनंद रॉय
‘बंगीय साहित्य संस्था’ साल भर अनेकों साहित्यिक आयोजन विगत 65 वर्षों से निरंतर करते आ रही है. संस्था द्वारा प्रति सप्ताह ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा’ के साथ-साथ प्रति माह ‘साहित्य सभा’ का आयोजन भी कर रही है.बीते शनिवार [22 नवम्बर, 2025] को ‘साहित्य सभा’ की 353वीं कड़ी संस्था की उप सभापति व बांग्ला कवयित्री स्मृति दत्त के निवास [नेहरू नगर] में सम्पन्न हुई. बांग्ला भाषा के उन्ननय, संस्कृति एवं सांस्कृतिक विरासत को छत्तीसगढ़ राज्य में बनाए रखने के लिए इस संस्था का गठन भाषाविद् व बांग्ला लेखक कवि स्व. शिबव्रत देवांजी, डॉ. भवानी प्रसाद मुखर्जी ने किया था. वर्तमान में इस संस्था की सभापति देश की लब्धप्रतिष्टित कवयित्री श्रीमती बानी चक्रवर्ती हैं. बांग्ला भाषा में प्रकाशित एक साहित्यिक पत्रिका ‘मध्यबलय’ संस्था के सौजन्य से कई वर्षों से किया जा रहा है. वर्तमान में इस लिटिल मेंगजिंन के संपादक कवि दुलाल समाद्दार हैं.

👉 [बाएँ से] • मीता दास, दीपाली दासगुप्ता,शर्मिष्ठा दास, स्मृति नाग, शेफाली भट्टाचार्य, बानी चक्रवर्ती, स्मृति दत्त और मौऊ रॉय

👉 [तीन महिला शख्सियत] • ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ की प्रकाशक शेफाली भट्टाचार्य, देश की लब्धप्रतिष्ठित लेखिका स्मृति दत्त और सुपरिचित मंच संचालक मौऊ रॉय

👉 [हम हैं साथ-साथ] • मनोरंजन दास, पल्लव चटर्जी, ब्रजेश मल्लिक, प्रदीप भट्टाचार्य और आलोक कुमार चंदा
▪️
‘साहित्य सभा-353’ में उपस्थित हुए-
• बानी चक्रवर्ती सभापति ‘बंगीय साहित्य संस्था’, कवयित्री व बांग्ला-अंग्रेजी की लेखिका.
• स्मृति दत्त उप सभापति ‘बंगीय साहित्य संस्था’ व कवयित्री.
• पल्लव चटर्जी कोषाध्यक्ष ‘बंगीय साहित्य संस्था’ व विचारवान कवि.
• मीता दास सुप्रसिद्ध अनुवादक व कवयित्री.
• दीपाली दासगुप्त सुप्रसिद्ध बांग्ला कवयित्री.
• प्रदीप भट्टाचार्य प्रगतिशील कवि,संपादक ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ व अध्यक्ष साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’.
• मोऊ रॉय बांग्ला मंच संचालक.
• मनोरंजन दास सुपरिचित गायक.
• गौतम शील गायक.
• पं. बासुदेव भट्टाचार्य हिंदुत्वकवि
• ब्रजेश मल्लिक राष्ट्रवादी कवि.
• शर्मिला दत्त गायिका.
• आलोक कुमार चंदा चिंतक.
• रविंद्रनाथ देबनाथ चिंतक.
• सुबीर रॉय समाजसेवी.
• शेफाली भट्टाचार्य
• स्मृति नाग
• शर्मिष्ठा दास
• अभिषेक दत्त और
• आनंद रॉय
▪️
‘साहित्य सभा-353’ में बानी चक्रवर्ती, पल्लव चटर्जी, मीता दास, दीपाली दासगुप्ता, प्रदीप भट्टाचार्य, आलोक कुमार चंदा और ब्रजेश मल्लिक ने काव्य पाठ किया : पं. बासुदेव भट्टाचार्य ने सरस्वती वंदना व लघु कथा का पाठ किया : गीत-संगीत से समां बाँधा मनोरंजन दास, गौतम शील, शर्मिला दत्त, मीता दास, स्मृति दत्त, मौऊ रॉय और प्रभात मंडल : आशीर्वचन उद्बोधन सुबीर रॉय और बानी चक्रवर्ती : श्रोता के रूप में उपस्थित थे- शेफाली भट्टाचार्य, रविंद्रनाथ देबनाथ, स्मृति नाग और शर्मिष्ठा दास : अभिषेक दत्त और आनंद रॉय ने अपने ऐम के बारे बताया

👉 • स्मृति दत्त स्वागत वक्तव्य देते हुए…

👉 • सुबीर रॉय आशीर्वाद स्वरूप उद्गगार प्रगट करते हुए…
• पल्लव चटर्जी ने ‘गंगा नदी’/• ब्रजेश मल्लिक ने माँ को समर्पित रचना ‘आमार स्वर्गवासी माँ…’/ • दीपाली दासगुप्ता ने प्रेरक कविता ‘श्रीति’/ • बानी चक्रवर्ती ने ‘तोमार आभाष’/ • मीता दास ने ‘बिसात विरह ऐर जंतना…’/ • आलोक कुमार चंदा ने शंकर नंदी लिखित कविता ‘चिंह’/ और • प्रदीप भट्टाचार्य ने ‘मध्यबलय-अंक 60’ में प्रकाशित प्रगतिशील परंपरा से समकालीन कविता को जोड़ती हुई सार्थक मुक्तक को मीता दास ने वाचन किया. इस अंक में प्रकाशित हिंदी कविता का बांग्ला अनुवाद तारकनाथ चौधुरी ने किया.

👉 • बानी चक्रवर्ती काव्य पाठ करते हुए…

👉 [बाएँ से] • पं. बासुदेव भट्टाचार्य, गौतम शील, दीपाली दासगुप्ता, पल्लव चटर्जी और प्रभात मंडल

👉 • प्रदीप भट्टाचार्य लिखित कविता का पाठ मीता दास ने किया [हिंदी से बांग्ला अनुवाद तारकनाथ चौधुरी ने किया]
पं. बासुदेव भट्टाचार्य ने अनु गोल्पो [लघु कहानी] ‘एक माँ से साक्षात्कार’
• मनोरंजन दास ने हेमंत कुमार की आवाज़ में गीत गाया/ • गौतम शील ने बांग्ला गीत ‘आमार प्रश्न करो…’/ • मौऊ रॉय ने ‘सखी भालो बासो…’/ शर्मिला दत्त ने बांग्ला में ‘आमादेर.. चोखे ऐर.. भाषा…’/प्रभात मंडल ने ‘मोने पोरे.. सई सब दिन…’
मीता दास ने दो हिंदी गीत गाया – ‘है अपना दिल तो आवारा, न जाने किसपे दिल आएगा..’ और ‘बेकरार करके हमें यूँ न जाइए,आपको हमारी कसम लौट आइए…’ {इस गीत में इनके साथ माउथ ऑरगन में गौतम शील एवं सिंथेसाइज़र में स्मृति दत्त ने संगत दिया}.
▪️
‘साहित्य सभा-353’ की अध्यक्षता ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की उप सभापति स्मृति दत्त, स्वागत वक्तव्य संस्था की सभापति बानी चक्रवर्ती, संचालन मौऊ रॉय और आभार व्यक्त शर्मिला दत्त ने किया.
[ • प्रस्तुति व रिपोर्ट प्रदीप भट्टाचार्य : फोटो क्लिक- पल्लव चटर्जी, प्रभात मंडल ]
🟥🟥🟥
chhattisgarhaaspaas
विज्ञापन (Advertisement)