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- ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा’ : आड्डाबाज़-106 में शामिल हुए- बानी चक्रवर्ती, स्मृति दत्त, दुलाल समाद्दार, समरेन्द्र विश्वास, प्रकाशचंद्र मण्डल, पल्लव चटर्जी, प्रदीप भट्टाचार्य, वीरेंद्रनाथ सरकार, आलोक कुमार चंदा, विपुल सेन, पुलीन पाल, सुबीर रॉय, ममता सरकार, तापस किरण रॉय, संध्या रॉय, रविंद्रनाथ देबनाथ, कृष्णचंद्र रॉय, शिवमंगल सिंह और एसके भट्टाचार्य.
‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा’ : आड्डाबाज़-106 में शामिल हुए- बानी चक्रवर्ती, स्मृति दत्त, दुलाल समाद्दार, समरेन्द्र विश्वास, प्रकाशचंद्र मण्डल, पल्लव चटर्जी, प्रदीप भट्टाचार्य, वीरेंद्रनाथ सरकार, आलोक कुमार चंदा, विपुल सेन, पुलीन पाल, सुबीर रॉय, ममता सरकार, तापस किरण रॉय, संध्या रॉय, रविंद्रनाथ देबनाथ, कृष्णचंद्र रॉय, शिवमंगल सिंह और एसके भट्टाचार्य.

👉 • ‘आड्डाबाज़-106’ में शामिल बंगीय सदस्य [इंडियन कॉफी हाउस, भिलाई निवास]
छत्तीसगढ़ आसपास
भिलाई
‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में अनेक साहित्यिक आयोजन के साथ-साथ प्रति सप्ताह ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा’ है. विगत 65 वर्षों से संचालित यह संस्था बांग्ला भाषा के उन्नयन, संस्कृति एवं सांस्कृतिक विरासत को छत्तीसगढ़ राज्य में बनाया हुआ है. इस संस्था का गठन भाषाविद् व बांग्ला लेखक स्व. शिबव्रत देवानजी और डॉ. भवानी प्रसाद मुखर्जी ने किया था. वर्तमान में संस्था की सभापति देश की लब्ध प्रतिष्ठित कवयित्री लेखिका लब्ध प्रतिष्ठित बानी चक्रवर्ती एवं उप सभापति बांग्ला की सुपरिचित वयोवृद्ध लेखिका श्रीमती स्मृति दत्त हैं. संस्था की एक बांग्ला में प्रकाशित मुखपत्र ‘मध्यबलय’ है. ‘मध्यबलय’ लिटिल मेंगजिंन के संपादक बांग्ला के प्रगतिवादी कवि दुलाल समाद्दार हैं. आड्डाबाज़-106, 13 दिसम्बर 2025 को भिलाई निवास के इंडियन कॉफी हाउस में सम्पन्न हुआ. साहित्यिक विचार-विमर्श, बांग्ला-हिंदी में काव्य पाठ में शिरकत हुए- बानी चक्रवर्ती [सभापति], स्मृति दत्त [उप सभा पति], दुलाल समाद्दार [संपादक], संस्था के संस्थापक सदस्य व बांग्ला कवि समरेंद्र विश्वास, प्रकाशचंद्र मण्डल [उप सचिव], पल्लव चटर्जी [कोषाध्यक्ष], प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ के अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य, बांग्ला कवि वीरेंद्रनाथ सरकार, विपुल सेन, पुलीन पाल, तापस किरण रॉय, ममता सरकार, प्रगतिशील कवि शिवमंगल सिंह, सामाजिक व साहित्यिक चिंतक आलोक कुमार चंदा, सुबीर रॉय, रविंद्रनाथ देबनाथ, कृष्णचंद्र रॉय, संध्या रॉय और एसके भट्टाचार्य. आड्डाबाज़-106 की अध्यक्षता बानी चक्रवर्ती और विशेष अतिथि के रूप में रविंद्र संगीत गायिका ममता सरकार थीं. संचालन प्रकाशचंद्र मण्डल और आभार व्यक्त तापस किरण रॉय ने किया.

👉 [बाएँ से] पुलीन पाल, आलोक कुमार चंदा, प्रदीप भट्टाचार्य, प्रकाशचंद्र मण्डल, स्मृति दत्त, बानी चक्रवर्ती और ममता सरकार

👉 [बाएँ से] बानी चक्रवर्ती, ममता सरकार, दुलाल समाद्दार और कृष्ण कांत रॉय

👉 • साहित्यिक विचार-विमर्श में शामिल ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के सक्रिय सदस्य
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कविता पाठ-
स्मृति दत्त ने ‘बांग्ला ओ हिंदी’/ बानी चक्रवर्ती ने ‘बाधव रे वाराणसी’/ ममता सरकार ने ‘कुंआ-र-धारे’/ दुलाल समाद्दार ने ‘अवसर जॉबनेर शुरूआत’/ शिवमंगल सिंह ने हिंदी कविता ‘पिता की अस्थियां’ को पढ़ा/ विपुल सेन ने ‘उदबास्तु’ [रिफूजी]/ वीरेंद्रनाथ सरकार ने ‘भरोसा'[बेचे थाकार नाम भरोसा]/ एसके भट्टाचार्य ने हिंदी कविता ‘संघर्ष’/ पल्लव चटर्जी ने ‘भालोबॉसा’ एवं ‘ऑमी बुड़ों होए गेचेछी’/ तापस किरण रॉय ने ‘स्टेचू’/ पुलीन पाल ने ‘आमार आइना’/ समरेंद्र विश्वास ने ‘मिथ्ये मिथ्ये मिथ्ये’/ आलोक कुमार चंदा ने शैम्मूयल विश्वास की कविता ‘अभिशब्द’ का पठन किया/ प्रकाशचंद्र मण्डल ने ‘किस बात का अहंकार’ [हिंदी] और ‘समोय कॉटार जेनो ऑपेखा करो ना’ [बांग्ला] कविता पढ़ा और अंत में प्रदीप भट्टाचार्य ने हिंदी में एक सम-सामयिकी प्रगतिवादी कविता को अपने अंदाज़ में पढ़ा.
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प्रकाशचंद्र मण्डल की कविता ‘किस बात का अहंकार’ को आप भी पढ़ें-

मिट्टी के ढेले में तैयार तुम/इंसान के रूप में हो परिचय/पर तुम्हें इतना घमंड क्यों है? किस बात का है अहंकार तुम्हारा? दो दिन इस बाजार में/खरीद-फरोख्त करोगे फिर/कुछ दिन बाद तुम्हें/अपनी मंज़िल पर जाना है/तुम्हारे दोस्त झूठे हैं/तुम्हारे सारे रिश्तेदार झूठे हैं/झूठी रंगीन इमारतें/झूठे बेटे और परिजन/चार लोग तुम्हें अपने कंधों पर/रेत के टीलों तक ले जाएंगे/नहीं तो ले जाएंगे तुम्हें/इलेक्ट्रीक के घर में/तुम्हारा सुंदर शरीर/जलकर राख हो जाएगा/फिर इतना घमंड क्यों है? बताओ भाई/तुमने इस जीवन में क्या किया है? तुम्हारी मेहनत का क्या फल मिला/आखिर में, सारी जिंदगी/मेहनत ही करते रहे/अंत में सब कुछ गंवाओगे/अब हरि के नाम पर नाव बहाकर/चलो बह चलें/ज्वार के खिंचाव से/सारे दुःख मिट जायेंगे/जब हरि हमें अपने करीब ले जायेंगे.
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‘आरंभ’ के संस्थापक सदस्य एवं प्रगतिशील कवि शिवमंगल सिंह ने संतोष श्रेयांस के संपादन में प्रकाशित साझा संकलन पुस्तक ‘मेरे पिता’ में छपी कविता ‘पिता की अस्थियां’ को पढ़ा. आप भी पढ़ें-


शवदाह से/पिता की अस्थियां/निकालते समय/मेरे हाथ कांप रहे थे/मैं डूब रहा था/पीड़ा के अनंत सागर में/आत्मसात कर रहा था/जीवन के अटल सत्य को/मेरे सामने/पिता का अदृश्य चेहरा/बार-बार घूम रहा था/मानो मेरे पिता/मुझसे बतियाना चाहते थे/पिता के साथ व्यतीत/तमाम स्मृतियां/चल चित्र की तरह/मेरे आँखों के सामने घूम रहे थे/कल तक पिता जीवित थे/किंतु, अब उनका/कंचन सी काया/तब्दिल हो गई थी/राख के ढेर में/पिता की अस्थियां उठाते समय/जीवन के अंतिम और अटल/सत्य को आत्मसात कर रहा था/समय का चक्र/कैसे घूम जाता है/पढ़ा और सुना था/और क्या से क्या हो जाता है/काल चक्र के खेल को/कोई समझ नहीं पाया है.
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आड्डाबाज़-106 की कुछ सचित्र झलकियाँ-

👉 • कवि शिवमंगल सिंह अपनी कृति ‘अनंत के अंतिम क्षण’ [काव्य नाटक] की प्रति ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ के संपादक को भेंट करते हुए : बायें से शिव मंगल सिंह और प्रदीप भट्टाचार्य

👉 [बायें से] वीरेंद्रनाथ सरकार, प्रदीप भट्टाचार्य, पल्लव चटर्जी, स्मृति दत्त, बानी चक्रवर्ती, विपुल सेन, समरेंद्र विश्वास, प्रकाशचंद्र मण्डल, आलोक कुमार चंदा, पुलीन पाल, कृष्ण कांत रॉय, रविंद्रनाथ देबनाथ, ममता सरकार और दुलाल समाद्दार

👉 [बायें से] संध्या तापस किरण रॉय, तापस किरण रॉय, वीरेंद्रनाथ सरकार, प्रदीप भट्टाचार्य, पल्लव चटर्जी, स्मृति दत्त, बानी चक्रवर्ती, विपुल सेन, समरेंद्र विश्वास और प्रकाशचंद्र मण्डल

👉 •आड्डाबाज़-106 में शामिल ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के सदस्य

• बानी चक्रवर्ती

• स्मृति दत्त

👉 • दुलाल समाद्दार, संपादक ‘मध्यबलय’

• समरेंद्र विश्वास

• प्रकाशचंद्र मण्डल

👉 • ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की सभापति बानी चक्रवर्ती अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए…

👉 • प्रगतिशील कवि प्रदीप भट्टाचार्य कविता पाठ करते हुए…
[ • रिपोर्ट व प्रस्तुति-परिकल्पना प्रदीप भट्टाचार्य एवं फोटो क्लिक पल्लव चटर्जी, दुलाल समाद्दार ]
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chhattisgarhaaspaas
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