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- ‘अगासदिया’ और ‘वैभव प्रकाशन’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित लेखक बद्रीप्रसाद पारकर की किताब ‘छत्तीसगढ़ी संस्कृति एवं हमारा समाज’ का विमोचन और ज्ञानपीठ प्राप्त देश के सुप्रसिद्ध कवि विनोद कुमार शुक्ल और प्रगतिशील परंपरा के जनवादी कवि नासिर अहमद सिंकदर को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि
‘अगासदिया’ और ‘वैभव प्रकाशन’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित लेखक बद्रीप्रसाद पारकर की किताब ‘छत्तीसगढ़ी संस्कृति एवं हमारा समाज’ का विमोचन और ज्ञानपीठ प्राप्त देश के सुप्रसिद्ध कवि विनोद कुमार शुक्ल और प्रगतिशील परंपरा के जनवादी कवि नासिर अहमद सिंकदर को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि

👉 • बद्रीप्रसाद पारकर की किताब ‘छत्तीसगढ़ी संस्कृति एवं हमारा समाज’ का विमोचन करते हुए अतिथि
• छत्तीसगढ़ आसपास
• भिलाई [भिलाई निवास के इंडियन कॉफी हाउस सभागार से]

👉 • ‘अगासदिया’ और ‘वैभव प्रकाशन’ द्वारा बद्रीप्रसाद पारकर को सम्मान करते हुए ‘अगासदिया’ के अध्यक्ष डॉ. परदेशीराम वर्मा और ‘वैभव प्रकाशन’ के प्रमुख डॉ. सुधीर शर्मा
‘अगासदिया’ एवं ‘वैभव प्रकाशन के संयुक्त तत्वावधान में 29 दिसंबर को भिलाई निवास कॉफी हाउस में हुए समारोह में लेखक बद्री प्रसाद पाकर की किताब ‘छत्तीसगढ़ी संस्कृति एवं हमारा समाज’ का विमोचन किया गया। शुरुआत में छत्तीसगढ़ महतारी वंदन महंत अंतराम के गायन से हुआ। आधार वक्तव्य में डॉक्टर सुधीर शर्मा ने कहा कि एक शिक्षाविद बद्री प्रसाद पाकर ने विगत 5 वर्ष में तीन पुस्तक लिखकर जो यश प्राप्त किया है वह प्रशंसनीय है।
मुख्य अतिथि इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय [खैरागढ़] में हिंदी-अंग्रेजी भाषा विभाग के प्रमुख डॉ. राजन यादव ने कहा कि-
छत्तीसगढ़ी संस्कृति से छत्तीसगढ़ का हर समाज एक सूत्र में बंधा हुआ है। बद्री प्रसाद पारकर ने इससे पूर्व दो किताबें और लिखी है वह संस्कृति के जानकार एवं लेखक हैं उनका लेखन बेहद प्रभावशाली है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार, कथाकार व ‘अगासदिया’ के अध्यक्ष डॉ. परदेशीराम वर्मा ने कहा कि-
बद्री प्रसाद पारकर शिक्षाविद रहे हैं वह अपने छोटे से गांव बेलौदी और छत्तीसगढ़ का नाम रोशन कर रहे हैं। उनके लेखन में सच्चाई और ईमानदारी देखते ही बनती है। यह संभावनाशील लेखक हैं।
स्वागत भाषण देते हुए कृति कार बद्रीप्रसाद पारकर ने राजभाषा आयोग और ‘वैभव प्रकाशन’ का आभार माना. जिन्होंने उनकी किताबों का प्रकाशन किया. डॉ. परदेशीराम वर्मा के सतत् प्रोत्साहन के लिए आभार मानते हुए कहा कि चौथी किताब उपन्यास के स्वरूप में शीघ्र ही पूरा कर लेंगे.
विशेष अतिथि लेखक एवं समाजसेवी जीआर राणा ने छत्तीसगढ़ी संस्कृति पर तथा डीपी देशमुख ने साहित्य और संस्कृति पर प्रभावशाली वक्तव्य देते हुए कहा कि एक ही परिवार से तीन लेखक और एक गांव से निकलना बड़ी उपलब्धि है।
वक्ता दीनदयाल साहू ने कहा कि बद्री प्रसाद अपने से छोटी उम्र के लोगों को भी भरपूर स्नेह देखकर छत्तीसगढ़ी संस्कृति का व्यावहारिक परिचय देते हैं। इस दौरान अगासदिया परिवार और वैभव प्रकाशन की ओर से लेखक बद्री प्रसाद पारकर का सम्मान किया गया।
इस अवसर पर उपस्थित हुए-
दुर्गाप्रसाद पारकर, मुकुंद पारकर, स्वराज पारकर, शिवेंद्र कुमार पारकर, प्रदीप पारकर, मोनिका स्मिता वर्मा, पूर्व न्यायधीश नीलमचंद सांखला, संतोष झांसी, वकील भारती, रामसेवक वर्मा, विजय वर्तमान, विजय गुप्ता, प्रशांत कान्सकर, यमुनोत्री वर्मा, डॉ. रघुनंदन ध्रव, डॉ. मिथिलेश पारकर, ओमप्रकाश जायसवाल, नरेश कुमार विश्वकर्मा और पत्रकार-लेखक मो. जाकिर हुसैन.
कार्यक्रम का संचालन शिक्षाविद् साहित्यकार व ‘निर्झरा’ की लेखिका डॉ. रजनी नेलसन ने किया और आभार मुनीलाल निषाद ने व्यक्त किया.
अंत में देश के शीर्षस्थ साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल और केदारनाथ अग्रवाल के प्रिय कवि मानने वाले एवं हिंदी व उर्दूअदब के जानकार कवि नासिर अहमद सिकंदर को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित किया गया. ‘जनवादी लेखक संघ’ के छत्तीसगढ़ राज्य के सचिव पीसी रथ ने उनके साहित्यिक रचना धर्मी के बारे में बताया और दोनों हस्तियों की स्मृति को बनाए रखने एवं प्रयास का संकल्प लिया गया.
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