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- ‘स्वामी विवेकानंद युवा समिति’ के तत्वावधान में कुशाग्र बुद्धि, युवा प्रणेता, शिक्षा उन्नायक, समाज सुधारक,धर्म प्रचारक एवं समरसता के प्रेरक गुणों से युक्त स्वामी विवेकानंदजी की 153वीं जयंती ‘युवा दिवस’ मनाया गया
‘स्वामी विवेकानंद युवा समिति’ के तत्वावधान में कुशाग्र बुद्धि, युवा प्रणेता, शिक्षा उन्नायक, समाज सुधारक,धर्म प्रचारक एवं समरसता के प्रेरक गुणों से युक्त स्वामी विवेकानंदजी की 153वीं जयंती ‘युवा दिवस’ मनाया गया

• छत्तीसगढ़ आसपास
• भिलाई
स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी,1863 को कोलकाता में अधिवक्ता पिता विश्वासनाथ दत्त और माता भुवनेश्वरी देवी के परिवार में हुआ था. 1984 से स्वामी विवेकानंद के जन्म दिवस 12 जनवरी को ‘युवा दिवस’ के रूप में मनाया जाता है. इसी संदर्भ में ‘स्वामी विवेकानंद युवा समिति’ ने जुबली पार्क [सेक्टर-6] में स्वामी विवेकानंद जी की 153वीं जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाया.

प्रारंभ में ‘स्वामी विवेकानंद युवा समिति’ के सदस्यों ने विवेकानंदजी के तैल चित्र में माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित किया. इस अवसर पर वरिष्ठ समाजसेवी गुरु प्रसाद तिवारी और शंकरलाल देवांगन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए.
गुरु प्रसाद तिवारी ने कहा कि-
स्वामी विवेकानंदजी ने अपने कम जीवन काल में ऐसा अद्वितीय कार्य किया जो आज भी समस्त भारतीय समाज ही नहीं, पूरा विश्व उनके कार्यों से परिचित हुआ. ब्रदर एंड सिस्टर के शिकागो में दिए गए उद्बोधन से सभी को आकर्षित किया. स्वामी जी 11 सितम्बर, 1893 के विश्व धर्म सभा के अपने भाषण के कारण विश्व प्रसिद्ध हुए. वे स्वतंत्रता आंदोलन के महान क्रांतिकारियों की प्रेरणा थे. उनके बताए गए मार्ग पर चलना और संकल्प लेना युवा पीढ़ी को करना है. आज हम उनको याद कर रहे हैं, हम संकल्प लें. यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी.
शंकरलाल देवांगन ने कहा कि-
स्वामी विवेकानंद जी ने युवाओं को आव्हान करते हुए कहा था ‘उठो, जागो, और लक्ष्य प्राप्ति से पहले मत रुको’.वे कहते थे ‘मेरा विश्वास युवा पीढ़ी में है’. राष्ट्र निर्माण के लिए कार्यकर्ता युवाओं से निकलेंगे. स्वामी जी ने युवाओं की कल्पना की थी. ‘भारत की कमजोरी आर्थिक गरीबी नहीं, बल्कि मानसिक गुलामी है’. वे कहा करते थे ‘गर्व से कहो-मैं भारतीय हूँ, हर भारतीय मेरा भाई-भाई है, भारत की मिट्टी मेरा सर्वोच्च स्वर्ग है. स्वामी जी के जन्म दिवस पर मेरी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित है.
कार्यक्रम में एस. ममता राव द्वारा राष्ट्रप्रेम और चरेवेति चरैवेति… मार्मिक गीत की प्रस्तुति दी.
‘स्वामी विवेकानंद युवा समिति’ के अध्यक्ष दीपक मिश्रा ने स्वामी जी को शत् शत् नमन करते हुए कहा कि-
स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था कि ‘जब एक हिंदू अपना धर्म छोड़ता है तब केवल एक हिंदू कम नहीं होता, बल्कि देश का एक शत्रु बढ़ जाता है’ आने वाली युवा पीढ़ी को स्वामी विवेकानंद जी के आदर्शों पर चलने की आवश्यकता होगी और यही उनके प्रति श्रद्धांजलि है.
इस अवसर पर उपस्थित हुए-
‘स्वामी विवेकानंद युवा समिति’ के महासचिव मनोज ठाकरे, कोषाध्यक्ष नरेंद्र यदु,चंदकिरण मिश्रा, महेंद्र पाल, सुमन शील, के.गणपति, बसंत प्रधान, राकेश कुमार शुक्ला, राजेश सिंह, दिनेश मिश्र, गजेंद्र प्रताप सिंह, रजनीकांत पाण्डेय, परवीन बानो, एस.ममता राव, अरुण पंडा, रवींद्र साहू, ज्योति सोनी, अभिनव गुप्ता, रीता चौबे, गायत्री वर्मा, नीता दुबे, ऋषिकांत द्विवेदी, प्रमोद यादव, रमेश शर्मा, जबीरुदीन, व्यक्तेश राव, जानकी राव और समिति के सक्रिय सदस्य व प्रबुद्धजन.
कार्यक्रम के अंत में समिति के संरक्षक रहे अनिल मिश्रा ‘अन्नू’ के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित किया गया.
संचालन दीपक मिश्रा और आभार व्यक्त नरेंद्र यदु ने किया.

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