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- ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा-110’ में शामिल हुए- स्मृति दत्त, प्रकाशचंद्र मण्डल, प्रदीप भट्टाचार्य, सोमाली शर्मा, विपुल सेन, सुजॉशा सेन, ममता सरकार, सुबीर रॉय और कृष्णचंद्र रॉय : बांग्ला-हिंदी में काव्य पाठ और बांग्ला साहित्य पर चर्चा
‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा-110’ में शामिल हुए- स्मृति दत्त, प्रकाशचंद्र मण्डल, प्रदीप भट्टाचार्य, सोमाली शर्मा, विपुल सेन, सुजॉशा सेन, ममता सरकार, सुबीर रॉय और कृष्णचंद्र रॉय : बांग्ला-हिंदी में काव्य पाठ और बांग्ला साहित्य पर चर्चा

👉 [बाएँ से] • कृष्णचंद्र रॉय, विपुल सेन, प्रदीप भट्टाचार्य, प्रकाशचंद्र मण्डल, स्मृति दत्त, ममता सरकार, सुजॉशा सेन और सोमाली शर्मा
• छत्तीसगढ़ आसपास
• भिलाई निवास [इंडियन कॉफी हाउस : 17 जनवरी, 2026]
‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा-110’ विगत दिनों भिलाई निवास के इंडियन कॉफी हाउस में सम्पन्न हुई. अध्यक्षता संस्था की उप सभापति एवं बांग्ला की सुप्रसिद्ध लेखिका श्रीमती स्मृति दत्त ने. आड्डा में शामिल हुए- बांग्ला-हिंदी के सुपरिचित कवि प्रकाशचंद्र मण्डल, प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ के अध्यक्ष व प्रगतिशील कवि, संपादक प्रदीप भट्टाचार्य, बांग्ला कवयित्री सोमाली शर्मा, सुजॉशा सेन,विपुल सेन, ममता सरकार, समाजसेवी सुबीर रॉय और कृष्णचंद्र रॉय. संचालन किया प्रकाशचंद्र मण्डल ने.

👉 [बाएँ से] • प्रदीप भट्टाचार्य, प्रकाशचंद्र मण्डल और स्मृति दत्त
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विपुल सेन, सुजॉशा सेन, सोमाली शर्मा, ममता सरकार, स्मृति दत्त, प्रकाशचंद्र मण्डल और प्रदीप भट्टाचार्य ने अपनी- अपनी प्रतिनिधि कविता/लघु कथा/प्रतिवेदन/बांग्ला गीत की प्रस्तुति दी-

👉 ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के उप सचिव प्रकाशचंद्र मण्डल और उप सभापति स्मृति दत्त

👉 [बाएँ से] • ममता सरकार, सुजॉशा सेन, सोमाली शर्मा और सुबीर रॉय
• विपुल सेन ने अनुगोलपो [लघु कथा] ‘एक टी सुखनो बुक’… और ‘मूक बघीर’ ‘
{बोबा}/ • सोमाली शर्मा ने भवानी प्रसाद मजूमदार लिखित कविता ‘पिथोलॉजी’ और ‘प्रेमेर बेला भूमि’/ • सुजॉशा सेन ने मल्लिका सेनगुप्ता की कविता ‘शुभम तोमाके’ और शुभ्रा घोष की एक रचना ‘प्रिय नेताजी’ का पाठ किया/ • ममता सरकार ने सुकांत भट्टाचार्य की एक रचना ‘एकटि मोरगेर काहिनी’/ • स्मृति दत्त ने ‘We Shall [Will] over come’ और ‘जाना ऑजाना’/ • प्रकाशचंद्र मण्डल ने ‘प्रेम भालोबासा मृगतृष्णा मोतोन…’, ‘किसेर अहंकार’… और ‘हॉकर- चोढ़छी सियालदाह तिके..’ शीर्षक से भावपूर्ण कविता का पाठ किया और • प्रदीप भट्टाचार्य ने आज के हालात एवं सामाजिक परिवेश को रेखांकित करती हुई छोटी-छोटी मुक्तक का पाठ किया.

👉 • ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा-110’ की अध्यक्षता ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की उप सभापति देश की सुप्रसिद्ध लेखिका श्रीमती स्मृति दत्त थीं
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आभार व्यक्त करते हुए सुबीर रॉय ने कहा कि-

हमें बांग्ला भाषा संस्कृति को बचाए रखने के लिए हमारे बच्चों को बांग्ला भाषा, संस्कृति और प्रख्यात लेखकों की पुस्तकों से अवगत कराना चाहिए. परिवार में मातृभाषा बंगाली में ही बात करना चाहिए, नहीं तो हमारे बच्चे आगे जाकर बांग्ला भाषा को भूल जाएंगे और हिंदी-अंग्रेजी को ही मातृत्व भाषा समझेंगे. ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के द्वारा ऐसे आयोजन से हमें सीखने को मिलता है.
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‘आड्डाबाज़’ में कुछ और फोटो क्लिक-

👉 [बाएँ से] • प्रदीप भट्टाचार्य, ममता सरकार, सुजॉशा सेन, सोमाली शर्मा, स्मृति दत्त, प्रकाशचंद्र मण्डल, सुबीर रॉय, कृष्णचंद्र रॉय और विपुल सेन

👉 [बाएँ से] • सुजॉशा सेन, सोमाली शर्मा और सुबीर रॉय
[ • प्रस्तुति- प्रदीप भट्टाचार्य ]
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