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आस्था आसपास : चंद्रखुरी [छत्तीसगढ़] में स्थित कौशल्या मंदिर : ‘चंद्रखुरी’ के सफल भ्रमण के बाद आचार्य डॉ. महेशचंद्र शर्मा ने बताया

👉 • ‘चंद्रखुरी’ में दशरथ महल के आंगन में कौशल्या समेत तीनों रानियों एवं श्रीराम सहित चारों भाईयों, वैद्यराज सुषेण, भगवान शिव और कपिश्वर हनुमान की मूर्तियां भी दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित करती है…
[ • चित्र में गोदी में पुत्र राम को लिये माँ कौशल्या की प्रतिमा ]
छत्तीसगढ़ [चंद्रखुरी] में स्थित कौशल्या मंदिर, दुर्लभ और विशेष है, क्योंकि यह पूरे देश में इस तरह का एक मात्र है। बाल रूप में श्रीराम माता की गोद में सुशोभित और भक्तों के मनमोहक हैं। माता कौशल्या जन्मभूमि सेवा संस्थान के अनुसार कौशल नरेश भानुमन्त की पुत्री कौशल्या कहलाईं। वाल्मीकि, तुलसीदास और कालिदास आदि ने भी इनका उल्लेख किया है।” मां कौशल्या देवी मंदिर चंदखुरी के दर्शन कर लौटे आचार्य डॉ.महेश चन्द्र शर्मा ने उक्त बातें कहीं। देश-विदेश के अनेक सफल शैक्षणिक – सांस्कृतिक भ्रमण कर, लेखक आचार्य डॉ.शर्मा ने हाल ही में चंदखुरी का भी सफल और विस्तृत भ्रमण किया।

👉 • आचार्य डॉ. महेशचंद्र शर्मा ने ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ को बताया कि- ‘श्रीराम के पूर्वज महाराजा दिलीप ने भी पुत्र प्राप्ति हेतु कामधेनु पुत्री नंदिनी की सेवा की थी. आज भी छत्तीसगढ़ में ‘नंदिनी’ नाम से कई स्थान जाने जाते हैं’
[ • चित्र में ‘चंद्रखुरी’ में भगवान श्रीराम की भव्य विशाल प्रतिमा ]
उल्लेखनीय है कि उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम, दंडकारण्य, कौशल, रामगढ़ (सरगुजा), लक्ष्मण मन्दिर श्रीपुर (सिरपुर) श्रृंगी ऋषि -सिहावा,शबरी नारायण, वैदेही विहार एवं लव-कुश विहार आदि पर अनेक लोकप्रिय और प्रामाणिक शोध लेख एवं पुस्तकें भी लिखी हैं। आचार्य डॉ.शर्मा ने बताया कि श्रीराम के पूर्वज महाराजा दिलीप ने भी पुत्र प्राप्ति हेतु कामधेनु पुत्री नंदिनी की सेवा की थी। आज भी छत्तीसगढ़ में नन्दिनी नाम से कई स्थान जाने जाते हैं। चंदखुरी में दशरथ महल के आंगन में कौशल्या समेत तीनों रानियों एवं श्री राम सहित चारों भाइयों, वैद्यराज सुषेण, भगवान शिव और कपिश्वर हनुमान की मूर्तियां भी दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। उधर सरोवर में अमृत हेतु देवों और दैत्यों द्वारा किये गये समुद्र मंथन की भी भव्य मूर्तियां हैं।

[ • चित्र में कौशल्या मंदिर परिसर : पीछे मूर्ति कला में समुद्र मंथन ]
आज देश-दुनिया में भगवान श्रीराम की भव्य और विशाल से विशाल प्रतिभाओं की चर्चा है.
इस आध्यात्मिक यात्रा में आचार्य डॉ. महेशचंद्र शर्मा की धर्मपत्नी रजनी गौरी शर्मा भी साथ थीं.
• लेखक संपर्क-
• 94255 53499
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