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‘सेवांजली सेवा संगठन’ ने मनाया 77वां गणतंत्र दिवस : ध्वजारोहण एवं सांस्कृतिक- वैचारिक कार्यक्रम हुए : अतिथि थे- संजय सिंह, कैलाश जैन बरमेचा

👉 • दुर्ग [पटेल चौक] में मानव अधिकार सेवा संगठन ‘सेवांजली’ के तत्वाधान में ध्वाजारोहण समारोह
• छत्तीसगढ़ आसपास
• दुर्ग
77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर दुर्ग [क्लेक्ट्रोल के पास पटेल चौक] में मानव अधिकार सेवा संगठन ‘सेवांजली’ के तत्वाधान में ध्वाजारोहण एवं सांस्कृतिक-वैचारिक समारोह का आयोजन किया गया. देशभक्ति, संवैधानिक चेतना और मानवीय एकता की भावना से ओतप्रोत यह आयोजन नगरवासियों के लिए एक स्मरणीय क्षण बन गया.
मुख्य अतिथि संजय सिंह ने राष्ट्रध्वज फहराया और स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान का स्मरण करते हुए उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि-

👉 • संजय सिंह सार्वजनिक जीवन में अनुशासन, संगठनात्मक निष्ठा और राष्ट्रसेवा के लिए पहचाने जाते हैं. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से प्रारंभिक संस्कार प्राप्त कर विद्यार्थी परिषद्, भारतीय जनता पार्टी, युवा मौर्चा, जिला-प्रदेश स्तर पर अनेक दायित्वों का निर्वहन किया. नरेंद्र मोदीजी के मार्गदर्शन में विजयव्रती कार्यकर्ता के रूप में समयदान से लेकर लोकसभा एवं विधानसभा चुनावों तक सक्रिय भूमिका रही. सामाजिक क्षेत्र, शिक्षा, स्वच्छता, चिकित्सा शिविर एवं खेल गतिविधियों में उल्लेखनीय योगदान रहा है.
26 जनवरी, 1950 का दिन भारत के इतिहास में लोकतंत्र, न्याय और समानता का स्वर्णिम अध्याय है. इसी दिन भारत ने अपने संविधान को पूर्ण रूप से लागू कर गणतांत्रिक गणराज्य के रूप में विश्व के समक्ष अपनी पहचान बनाई. आज आवश्यकता है कि हम संविधान की भावना को केवल उत्सव तक सीमित न रखें, बल्कि उसे अपने आचरण और सामाजिक व्यवहार में उतारें.
ध्वाजारोहण के विशिष्ट अतिथि कैलाश जैन बरमेचा ने कहा कि-

👉 • प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ के मुख्य संरक्षक कैलाश जैन बरमेचा वर्षों से संगीत, साहित्य और सेवा के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए ‘लायंस क्लब’, ‘बेटी बचाओ मंच’ सहित अनेक संस्थाओं के माध्यम से नि:स्वार्थ सेवा करते आ रहे हैं.
डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान केवल पढ़ने या ध्वाजारोहण तक सीमित रखने की वस्तु नहीं है. इसे विचारों, मन:स्थिति और कर्म में उतारना होगा. जाति, वर्ण और भेदभाव से ऊपर उठकर मानवता के लिए समर्पित होना ही संविधान की सच्ची आत्मा है. यही हमारे स्वतंत्रता सेनानियों और बाबा साहेब को सच्ची श्रद्धांजलि होगी.
कार्यक्रम का संचालन अनीश रजा ने किया और एक शेर पढ़कर उपस्थित जनसमूह में गणतंत्र की सामूहिक चेतना जगाई-
“माथे पर हमारी पहचान चाहे जो भी हो, लेकिन दिल में हमेशा हिंदुस्तान ही होना चाहिए”


‘सेवांजली सेवा संगठन’ के अध्यक्ष जाहिद अली ने आभार व्यक्त करते हुए बताया कि-
संगठन विगत 20 वर्षों से 15 अगस्त एवं 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय पर्वों को निरंतर खुले मंच पर आयोजित करते आ रहा है. वर्ष 2000 से प्रारंभ यह परंपरा वर्ष 2019 के बाद और अधिक व्यापक रूप में कौमी एकता, जाति-वर्ण से ऊपर उठकर व्यक्ति से व्यक्ति के मिलन का संदेश दे रही है- ‘हम हिंदुस्तानी हैं और सिर्फ हिंदुस्तानी’
इस अवसर पर ‘सेवांजली’ समिति के प्रमुख सुरेश गिलानी, विनोद वाघ, विजय गुप्ता, वसीम रज़ा, बाबी सोनी, अशोक पटवा, संजय दुबे, प्रकाश शर्मा, मो. अशफाक अनवर हुसैन, हाजी इस्माइल चौहान, असगर अली, संदीप वाघ, सूर्यमणि मिश्रा, अकील पुवार, अहमद भाई मुन्ना, वकील पुवार, आरिफ रज़ा, दिनेश सिंह, लियाकत अली, अबरार पुवार, रामदास यादव, हेमराज माने, भूपेंद्र यादव, फ़जल, शंकर तांडी, राजू भाई फुलवाला, इस्माइल राजू, बैगापारा कबड्डी टीम के खिलाड़ी एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे.
• संचालन अनीश रज़ा और आभार व्यक्त जाहिद अली ने किया.
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