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- भेंट मुलाकात : प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ के अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य, सचिव आलोक कुमार चंदा और कोषाध्यक्ष प्रकाशचंद्र मण्डल ने 77वें गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य पर ‘आरंभ’ के मुख्य सलाहकार समाजसेवी कैलाश जैन बरमेचा से आत्मीय मुलाकात कर उनके जन्मदिन की बधाई और गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी
भेंट मुलाकात : प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ के अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य, सचिव आलोक कुमार चंदा और कोषाध्यक्ष प्रकाशचंद्र मण्डल ने 77वें गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य पर ‘आरंभ’ के मुख्य सलाहकार समाजसेवी कैलाश जैन बरमेचा से आत्मीय मुलाकात कर उनके जन्मदिन की बधाई और गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी

👉 • जन्मदिन पर ‘आरंभ’ की तरफ से बधाई व उनके दीर्घायु होने की शुभकामनाएं दी. [बाएँ से] प्रकाशचंद्र मण्डल, आलोक कुमार चंदा, कैलाश जैन बरमेचा और प्रदीप भट्टाचार्य.


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प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ साहित्य समिति का गठन 11 नवम्बर, 2025 को साहित्यिक चिंतनशील,उद्योगपति, समाजसेवी, लेखक कैलाश जैन बरमेचा और संस्कृताचार्य-आचार्य डॉ. महेशचंद्र शर्मा के नेतृत्व में प्रदीप भट्टाचार्य, डॉ. रजनी नेलसन, अनिता करडेकर, त्रम्बयक राव साटकर ‘अंबर’, शानू मोहनन, डॉ. संध्या श्रीवास्तव, दीप्ति श्रीवास्तव, नूरस्साबाह खान ‘सबा’, आलोक कुमार चंदा, ठाकुर दशरथ सिंह भुवाल, प्रकाशचंद्र मण्डल, पल्लव चटर्जी, सुबीर रॉय, गौरी चक्रवर्ती गुहा, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, डॉ. बीना सिंह ‘रागी’, विद्या गुप्ता, तारक नाथ चौधुरी, शिवमंगल सिंह, डॉ. विजय गुप्ता ‘मुन्ना’ और दीपक टंडन जैसे सामाजिक लब्धप्रतिष्ठत लेखक, पत्रकार व रचनाकार ने एकजुट होकर ‘आरंभ’ की नींव रखी.

👉 • 11 नवम्बर, 2025 को ‘आरंभ’ की पहली गठन बैठक में मोटिवेशनल अतिथि के रूप में लब्धप्रतिष्ठत व्यंग्यकार-कवि रवि श्रीवास्तव और सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार विनोद साव उपस्थित हुए

👉 • 20 दिसम्बर, 2025 को हुई दूसरी सांगठनिक बैठक में मोटिवेशनल अतिथि पत्रकार- कथाकार शिवनाथ शुक्ला और पत्रकार-लेखक मोहम्मद जाकिर हुसैन उपस्थित थे
प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ का उद्देश्य है – ‘आरंभ हो, अंत न हो-चिंतन कभी कलांत न हो’. ‘मैं’ से ऊपर उठकर ‘हम’ की भावना को स्थापित करना. हर साहित्य साधक को सम्मान देना और साहित्य को समाज एवं आम लोगों से जोड़ना. कथा सम्राट प्रेमचंद ने कहा था- ‘हर वह सफलता हार है, जिसका लक्ष्य किसी को नीचा दिखाना है’. प्रसिद्ध व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई का कथन भी स्मरणीय है- ‘सत्य को भी प्रचार चाहिए, अन्यथा वह मिथ्या मान लिया जाता है’.
‘आरंभ’ की प्रतिबद्धता है कि- ‘संस्था हर उस व्यक्ति का स्वागत करेगी जो साहित्य की शक्ति में विश्वास रखता है, जो समाज को बदलने का सपना देखता है और जो बिना किसी स्वार्थ के लेखनी को मानवता की सेवा मानता है’. हम ‘आरंभ’ को एक ऐसा मंच बनाने की कोशिश करेंगे, जहाँ साहित्यिक साधक अपनी साधना से समाज को नई दिशा देने में कुछ हद तक सफल होने का प्रयास करेंगे. ‘आरंभ’ का संकल्प है- प्रतिमाह रचनात्मक विचार-विमर्श/गोष्ठी एवं काव्य गोष्ठी. प्रतिवर्ष सर्वश्रेष्ठ लेखन के लिए ‘आरंभ’ सम्मान और ‘आरंभ’ साहित्यिक पत्रिका का प्रकाशन.
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रचनात्मक कार्यक्रम की शुरुआत 08 फरवरी, 2026 को शाम-ए-ग़ज़ल से किया जा रहा है. ‘आरंभ’ के विचारों का हुस्ने कमाल है, चेहरे पे शायरों के जो आया है जमाल है. इक दिन ग़ज़ल की शान में इतराएंगे सभी, तकदीर में लिखा नहीं इसके ज़वाल है. सादर आमंत्रित ग़ज़लकार हैं- अब्दुल लतीफ़ खान , अब्दुस्सलाम कौसर, सुखनवर हुसैन, आलिम नकवी, आर. डी. अहिरवार, पूरन जायसवाल, इरफ़ानुद्दीन इरफ़ान, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, राकेश गुप्ता ‘रूसिया’ और शाहीन अंसारी. संचालन नूरुस्साबाह खान ‘सबा’ महासचिव ‘आरंभ’ एवं सदरे मुशायरा- जनाब अब्दुल लतीफ़ खान.
इस आयोजन में ‘आरंभ’ के संस्थापक सदस्य/सदस्य एवं सादर आमंत्रित अतिथि एवं रचनाकार उपस्थित रहेंगे.
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