- Home
- Chhattisgarh
- ‘राष्ट्रीय सर्व ब्राह्मण समाज’ : जातिगत भेदभाव की परिभाषा से संबंधित [यूजीसी] में नए नियम को लेकर समाज ने राष्ट्रपति के नाम जिलाधीश को ज्ञापन सौंपा : ज्ञापन ‘राष्ट्रीय सर्व ब्राह्मण समाज’ के महासचिव शशिकांत तिवारी और संरक्षक प्रभुनाथ मिश्र के नेतृत्व में समाज के सैकड़ों लोगों ने एसडीएम उत्तम ध्रुव को दिया गया
‘राष्ट्रीय सर्व ब्राह्मण समाज’ : जातिगत भेदभाव की परिभाषा से संबंधित [यूजीसी] में नए नियम को लेकर समाज ने राष्ट्रपति के नाम जिलाधीश को ज्ञापन सौंपा : ज्ञापन ‘राष्ट्रीय सर्व ब्राह्मण समाज’ के महासचिव शशिकांत तिवारी और संरक्षक प्रभुनाथ मिश्र के नेतृत्व में समाज के सैकड़ों लोगों ने एसडीएम उत्तम ध्रुव को दिया गया

👉 • ‘राष्ट्रीय सर्व ब्राह्मण समाज’ और ‘सवर्ण समाज’ द्वारा यूजीसी के विरोध में प्रदर्शन
• छत्तीसगढ़ आसपास
• जिला-दुर्ग कलेक्टर परिसर से
दुर्ग [30 जनवरी, 2026] ‘राष्ट्रीय सर्व ब्राह्मण समाज’ भिलाई-दुर्ग के तत्वावधान में शैक्षणिक संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव रोकने एवं नए ‘यूजीसी’ कानून को वापस लेने हेतु जिला प्रशासन कार्यालय में महामहिम राष्ट्रपति के नाम जिलाधीश को एक ज्ञापन ‘राष्ट्रीय सर्व ब्राह्मण समाज’ के राष्ट्रीय महासचिव शशिकांत तिवारी एवं संरक्षक प्रभुनाथ मिश्र के नेतृत्व में एसडीएम उत्तम ध्रुव को दिया गया. ज्ञापन सौंपते वक्त ‘राष्ट्रीय सर्व ब्राह्मण समाज’ के अनेक पदाधिकारी, युथ विंग एवं महिला प्रकोष्ठ के पदाधिकारी उपस्थित थे.

‘राष्ट्रीय सर्व ब्राह्मण समाज’ ने कहा कि-
केंद्र सरकार इस कानून को बिना विलंब किए वापस लें. इस कानून से सामाजिक ताना-बाना उलझेगा और समाज में आपसी संबंधों में गलत प्रभाव पड़ेगा. ब्राह्मण समाज एवं सवर्ण समाज कभी नहीं चाहेगा कि इस तरह का संघर्ष और मतभेद की स्थिति हमारे युवा वर्ग और विशेषकर शिक्षा प्राप्त कर रहे संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव का बीजारोपण हो. ऐसे नियम से देश में अशांति, अराजकता और वर्ग संघर्ष का दौर चल पड़ेगा, जो ब्राह्मण समाज ही नहीं सवर्ण समाज सहित अन्य समाजों को कतई स्वीकार नहीं.
‘राष्ट्रीय सर्व ब्राह्मण समाज’ ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि-

बीते कल [गुरुवार] सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय परिसर में जाति आधारित भेदभाव को रोकने से संबंधित हालिया ‘यूजीसी’ समानता विनिमयन पर रोक लगा दी. कोर्ट ने कहा कि ये विनियम प्रथम दृष्टया ‘अस्पष्ट’ प्रतीत होते हैं और इनका दुरुपयोग किए जाने की आशंका है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में हस्तक्षेप नहीं किया तो खतरनाक प्रभाव पड़ेगा और समाज बंटेगा. सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी किया है. अगली सुनवाई 19 मार्च, 2026 को होगी. नए नियम स्थगित रहने तक यूजीसी के 2012 के नियम लागू रहेंगे. ज्ञात हो कि 13 जनवरी को यूजीसी [उच्चशिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा] विनियम, 2026 अधिसूचित किया था. इनका मकसद धर्म, जाति, लिंग, जन्मस्थान या दिव्यांगता के आधार पर भेदभाव रोकना था. इनमें एससी, एसटी, ओबीसी वर्ग शामिल है. 2012 के नियम एससी-एसटी पर केंद्रित थे. नए नियम बाध्यता है और उल्लंघन करने पर कड़ी कारवाई हो सकती है. देश भर में नए ‘यूजीसी’ नियम को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा कि नया ड्राफ्ट तैयार करें.

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि- “क्या हम जाति विहीन समाज की तरफ बढ़ रहे हैं या पीछे जा रहे हैं? भगवान के लिए ऐसा न करें! इंटरकॉस्ट भी विवाह होती है.”
जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि- “प्रगतिशील कानून में पीछे क्यों जाएं? उम्मीद है हम अमेरिका जैसे अलग स्कूलों की ओर नहीं बढ़ेंगे, जहाँ अश्वेत-श्वेत के अलग स्कूल थे. समाज और देश में एकता कायम रहना चाहिए. नए नियम से अलग हॉस्टल बन जाएंगे, ऐसा नहीं होना चाहिए?”
यूजीसी के नियम क्या है? –
* हर कॉलेज में ‘समता समिति’ बनानी होगी, जिसके अध्यक्ष कॉलेज के प्रमुख होंगे.
* हर कॉलेज में ईक्वल अपाच्युर्निटी सेंटर [ईओसी] बनेगा.
* ईओसी पिछड़े और विंचित छात्रों को पढ़ाई फीस और भेदभाव से जुड़ी मदद देगा.
* कमेटी में एससी,एसटी,ओबीसी, महिलाएं और दिव्यांग शामिल होंगे. कमेटी का कार्यकाल 2 वर्ष का रहेगा.
* कॉलेज में इक्वलिटी स्क्वाड भी बनेगा जो भेदभाव की निगरानी करेगा.
* भेदभाव की शिकायत पर 24 घंटे में मीटिंग जरूरी होगी. 15 दिन में रिपोर्ट कॉलेज प्रमुख को देना होगा.
* कॉलेज प्रमुख को 7 दिन में आगे की कारवाई शुरू करनी होगी.
* ‘ईओसी’ हर 6 माह में कॉलेज को रिपोर्ट देगा.
* कॉलेज को जाति भेदभाव पर हर साल ‘यूजीसी’ को रिपोर्ट भेजनी होगी.
* ‘यूजीसी’ राष्ट्रीय निगरानी कमेटी बनाएगा. नियम को तोड़ने पर कॉलेज की ग्रांट रोकी जा सकती है.
‘राष्ट्रीय सर्व ब्राह्मण समाज’ इसी ‘यूजीसी’ के विरोध में धरना प्रदर्शन किया और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा. इस अवसर पर समाज प्रमुख उपस्थित हुए-



शशिकांत तिवारी, प्रभुनाथ मिश्रा, सुमित शर्मा, डॉ. विश्वनाथ पाणिग्रही, अभिषक पांडे, सुरेंद्र शर्मा, लक्ष्मीकांत तिवारी, पीयूष मिश्रा, नमिता शर्मा, काजल मिश्रा, प्रीति अजय बेहरा, मंजरी दुबे, शैलकिरण शुक्ला, मृदुला शुक्ला, अजय शर्मा, कमल नारायण शर्मा, हेमंत तिवारी, वाणी राव, अभिषेक अवस्थी, लकी पांडे, राजीव थपलियाल, अरुण पंडा, शंकरचरण पांडे, ब्रिजमोहन तिवारी, सरोज मिश्र, आनंद महाराज, रविंद्र दुबे, दिनेश मिश्र, चंद्रशेखर पांडे, दौलत जोशी, आनंद तिवारी, प्रदीप पाण्डे, शिवाकांत तिवारी, अंजनी उपाध्याय, कनक मिश्र, संध्या तिवारी, अंजू तिवारी, सरिता मिश्रा, शशिकांत दुबे, अमित पांडे, आरती शुक्ला, एच शास्त्री, नरेश चौरे, सरस्वती शर्मा, सतीश शर्मा, विकास पांडे, रविंद्र कुमार दुबे, हिमांशु शुक्ला, मयंक शर्मा, सत्यम वैष्णव, ओम वैष्णव, सूर्यकांत पाण्डे, नंदू महाराज, विभांशु पंडित, ईशान दुबे, योगिता शर्मा, विभा मिश्रा, कांता जोशी, शिखा तिवारी, विजय नारायण तिवारी, सुधीर पाटणकर, तुलिका तिवारी, आदित्य शर्मा, सुरेंद्र गौतम, सुभाष तिवारी, जेपी अग्निहोत्री, राघवेंद्र प्रसाद पाठक, शाश्वत पांडे, संजय दुबे, वीएन मिश्र, अजय दुबे, महेश दुबे, रामेश्वर शर्मा, मुकेश दीवान, टोशानंद शुक्ला, सुनील पांडे, मनीष तिवारी, रितेश मिश्र, नंदकिशोर शर्मा, रोमा मिश्रा, सुनील पांडे, गोविंद देव, भागवत शुक्ला सहित ‘छत्तीसगढ़ बंगाली ब्राह्मण समाज’ के प्रदेश संयोजक प्रदीप भट्टाचार्य और ‘राष्ट्रीय सर्व ब्राह्मण समाज’ के प्रदेश सचिव राकेश कुमार शुक्ला ने भी समर्थन दिया.
🟥🟥🟥
chhattisgarhaaspaas
विज्ञापन (Advertisement)