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- ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा’-112 में साहित्य के ‘आड्डाबाज़’ शामिल हुए- स्मृति दत्त, शुभेंदु बागची, समरेंद्र विश्वास, प्रदीप भट्टाचार्य, आलोक कुमार चंदा, सुबीर रॉय, पं. बासुदेव भट्टाचार्य, कृष्णचंद रॉय, रतन सरकार और सोमेश्वर राव : अंतर्राष्ट्रीय बांग्ला पुस्तक मेला-2026 पर चर्चा एवं काव्य पाठ
‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा’-112 में साहित्य के ‘आड्डाबाज़’ शामिल हुए- स्मृति दत्त, शुभेंदु बागची, समरेंद्र विश्वास, प्रदीप भट्टाचार्य, आलोक कुमार चंदा, सुबीर रॉय, पं. बासुदेव भट्टाचार्य, कृष्णचंद रॉय, रतन सरकार और सोमेश्वर राव : अंतर्राष्ट्रीय बांग्ला पुस्तक मेला-2026 पर चर्चा एवं काव्य पाठ

👉 [बाएँ से] • सुबीर रॉय, पं. बासुदेव भट्टाचार्य, समरेंद्र विश्वास, प्रदीप भट्टाचार्य, शुभेंदु बागची, स्मृति दत्त, सोमेश्वर राव, रतन सरकार और कृष्णचंद्र रॉय
• छत्तीसगढ़ आसपास
• भिलाई निवास [इंडियन कॉफी हाउस : 31 जनवरी, 2026]
बांग्ला साहित्य, संस्कृति एवं सांस्कृतिक के प्रति समर्पित विगत 65 वर्षों से संचालित ‘बंगीय साहित्य संस्था’ साहित्य सभा, कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा के अलावा बांग्ला साहित्यिक पत्रिका ‘मध्यबलय’ का प्रकाशन कर रही है. इस संस्था की नींव दिवंगत बांग्ला लेखक-कवि शिबव्रत देवानजी ने किया था और ‘मध्यबलय’ के संपादक बांग्ला कवि दुलाल समाद्दार कर रहे हैं. वर्तमान में संस्था की अध्यक्षा, कवयित्री बानी चक्रवर्ती और महासचिव शुभेंदु बागची हैं.
कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा सबसे लोकप्रिय कार्यक्रम है.
इस सप्ताह कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा-112 में शामिल हुए-
* ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की उप सभापति, देश की लब्धप्रतिष्ठत बांग्ला लेखिका श्रीमती स्मृति दत्त. • संस्था के महासचिव, बांग्ला साहित्यिक संस्था ‘पुबेर हावा’ के अध्यक्ष व बांग्ला-हिंदी के कवि शुभेंदु बागची. • देश के विचारवान कवि-लेखक व संस्था के संरक्षक समरेंद्र विश्वास. • प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ के अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य. • ‘आरंभ’ के सचिव आलोक कुमार चंदा. • ‘आरंभ’ के संयोजक व समाजसेवी सुबीर रॉय. • हिंदुत्ववादी कवि पं. बासुदेव भट्टाचार्य. • विचारक कृष्णचंद्र रॉय. • समाजसेवी रतन सरकार और कवि सोमेश्वर राव.
आड्डा-112 की अध्यक्षता स्मृति दत्त ने किया. विशेष आमंत्रित हुए शुभेंदु बागची, संचालन प्रदीप भट्टाचार्य और आभार व्यक्त कृष्णचंद्र रॉय ने किया.

👉 [बाएँ से] • प्रदीप भट्टाचार्य, शुभेंदु बागची और स्मृति दत्त

👉 [बाएँ से] • कृष्णचंद्र रॉय, आलोक कुमार चंदा, प्रदीप भट्टाचार्य, शुभेंदु बागची, समरेंद्र विश्वास, स्मृति दत्त, पं. बासुदेव भट्टाचार्य, रतन सरकार और सोमेश्वर राव
प्रारंभ में समरेंद्र विश्वास और स्मृति दत्त ने कोलकाता में चल रहे अंतर्राष्ट्रीय बांग्ला पुस्तक मेला [22 जनवरी-03 फरवरी, 2026] के बारे में विस्तार से अपने संस्मरण सुनाएँ-

👉 • स्मृति दत्त ने पुस्तक मेला से लौटकर अपने अनुभव को साझा किया

👉 [बाएँ से] • पल्लव चटर्जी, दुलाल समाद्दार, पीयूष विश्वास, समरेंद्र विश्वास और रविंद्रनाथ देबनाथ
इस वर्ष का पुस्तक मेला-2026, 49वां आयोजन है. बीते वर्ष 2025 में 27 लाख लोग मेला में शामिल हुए. 21 देशों के प्रतिनिधि की मौजुदगी में 1000 स्टॉल में 223 लाख देश-विदेशों के लेखकों के पुस्तक अवलोकनार्थ थे. इस वर्ष पुस्तक मेला में बानी चक्रवर्ती, स्मृति दत्त, समरेंद्र विश्वास, प्रकाशचंद्र मण्डल, पल्लव चटर्जी, सोमाली शर्मा, दीपिका विश्वास और रविंद्रनाथ देबनाथ शामिल हुए हैं. इनके पुस्तकों को विमोचन भी हुआ. समरेंद्र विश्वास के कहानी संग्रह ‘अयनेर अभिनेत्री उ आकाश महल’/प्रकाशचंद्र मण्डल के बांग्ला कविता संग्रह ‘एखोनो अनेकटा पथ चोलते बाकी’/स्मृति दत्त की कृति ‘केमेस्ट्री प्रेक्टिकल ओ टीवी शो’ बिहार- बांग्ला समिति के बुक स्टॉल-488 में डिस्प्ले हो रहा है. इस बार करुणामयी मेला में ‘अर्जेन्टीना’ संस्कृति की प्रस्तुति को दर्शाया गया है.
काव्य पाठ में उपस्थित बंगीय सदस्यों ने अपनी-अपनी प्रतिनिधि रचनाओं का पाठ किया. संचालन बांग्ला में प्रगतिशील कवि प्रदीप भट्टाचार्य ने किया-

👉 • संचालन करते हुए प्रदीप भट्टाचार्य
• पं. बासुदेब भट्टाचार्य ने पुस्तक मेला पर व्यंग्य कसती हुई एक रचना ‘बोई मेला घटित…’ और ‘समाधान’/ • समरेंद्र विश्वास ने ‘मकबूल’ शीर्षक से एक गंभीर रचना का पाठ किया./ • आलोक कुमार चंदा ने सुदेशना भट्टाचार्य चौधुरी की लिखित कविता ‘आसबे प्रेम’/ • स्मृति दत्त ने ‘बोई’ [कागज] और लेखा कॉखोनो हारिये जाबेना…’/ • सुबीर रॉय ने ‘ऐ जिंदगी थोड़ा रुक जा…’/ • प्रदीप भट्टाचार्य ने छोटी-छोटी कविता, शेरो-शायरी और • सोमेश्वर राव ने ‘पता थोड़े ही होता है…’ का पाठ किया.
कृष्णचंद्र रॉय और रतन सरकार ने आड्डा की निरंतरता पर कहा कि ऐसे आयोजन से बौद्धिक विकास तो होता ही है और रचना सुनकर प्रेरणा भी मिलती है. देश-विदेश में लिखी जा रही लेखकों की रचनाओं से रु-ब-रु भी होने का मौका मिलता है.
शुभेंदु बागची लंबी बीमारी के बाद आड्डा में शामिल हुए और कहा कि-

मैं गम्भीर बीमारी से उठकर लगभग 2-3 वर्षों बाद बैठक में शामिल हुआ, ये सब आपकी दुआओं का असर है और मुझे शक्ति मिली कि पुन: आपके बीच में हूँ. शुभेंदु बागची ने 3 यथार्थवादी ग़ज़ल को पढ़ा. ये ग़ज़ल बीमारी के समय लिखी गई ग़ज़लें हैं- • इल्तिज़ा • धुंध और • तेरी मुरादों में बसती है मेरी सांसें…
पं. बासुदेब भट्टाचार्य ने ‘भारत सेवाश्रम संघ’ द्वारा संचालित ‘हिंदू मिलन मंदिर’ द्वारा आयोजित आध्यात्मिक कार्यक्रम और प्रदीप भट्टाचार्य ने ‘आरंभ’ के तत्वावधान में होने जा रही साहित्यिक कार्यक्रम ‘शाम-ए- ग़ज़ल’ की सूचना दी- [ 🙏 आप सादर आमंत्रित हैं ]


[ • प्रस्तुति रिपोर्ट : प्रदीप भट्टाचार्य ]
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chhattisgarhaaspaas
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