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- ‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा-114’ में शामिल हुए- स्मृति दत्त, दुलाल समाद्दार, प्रकाशचंद्र मण्डल, पल्लव चटर्जी, प्रदीप भट्टाचार्य, आलोक कुमार चंदा, ब्रजेश मल्लिक, वीरेंद्रनाथ सरकार, जीबोन हालदार, कृष्णचंद्र रॉय रविंद्रनाथ देबनाथ और रतन सरकार : साहित्यिक चर्चा एवं बांग्ला-हिंदी में काव्य पाठ
‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा-114’ में शामिल हुए- स्मृति दत्त, दुलाल समाद्दार, प्रकाशचंद्र मण्डल, पल्लव चटर्जी, प्रदीप भट्टाचार्य, आलोक कुमार चंदा, ब्रजेश मल्लिक, वीरेंद्रनाथ सरकार, जीबोन हालदार, कृष्णचंद्र रॉय रविंद्रनाथ देबनाथ और रतन सरकार : साहित्यिक चर्चा एवं बांग्ला-हिंदी में काव्य पाठ

• छत्तीसगढ़ आसपास
• भिलाई
‘बंगीय साहित्य संस्था’ के तत्वावधान में आयोजित ‘कॉफी विथ साहित्यिक विचार-विमर्श आड्डा-114’ भिलाई निवास के इंडियन कॉफी हाउस में 14 फरवरी को सम्पन्न हुआ.
‘आड्डाबाज़’-114 की अध्यक्षता ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की उप सभापति एवं बांग्ला की लब्धप्रतिष्ठत लेखिका व कवयित्री स्मृति दत्त थीं.
• आड्डाबाज़’- 114 में शामिल हुए-
बांग्ला भाषा में प्रकाशित साहित्यिक पत्रिका ‘मध्यबलय’ के संपादक व बांग्ला कवि दुलाल समाद्दार, संस्था के उप सचिव व बांग्ला-हिंदी के महत्वपूर्ण कवि प्रकाशचंद्र मण्डल, संस्था के कोषाध्यक्ष व प्रगतिशील बांग्ला कवि पल्लव चटर्जी, प्रगतिशील जन-विचारधारा की साहित्यिक संस्था ‘आरंभ’ के अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य, ‘आरंभ’ के सचिव आलोक कुमार चंदा, राष्ट्रवादी कवि ब्रजेश मल्लिक, बांग्ला कवि वीरेंद्रनाथ सरकार, जीबोन हालदार, सामाजिक चिंतक रतन सरकार, कृष्णचंद्र रॉय और रविंद्रनाथ देबनाथ.
• बांग्ला-हिंदी में काव्य पाठ हुआ. संचालन किया प्रकाशचंद्र मण्डल ने-
• जीबोन हालदार ने ‘भाद्रो मास’ एवं ‘चरित्रहीन’/ • आलोक कुमार चंदा ने प्रकाशचंद्र मण्डल लिखित कविता ‘मृत्यु चिरसत्य तबुओ’ का पाठ किया/ • प्रदीप भट्टाचार्य ने मुक्तक पढ़ा/ • प्रकाशचंद्र मण्डल ने ‘काव्य धारा नील आकाशेर नीचे’, ‘आमी सोकॉल होते चाई’ और ‘एक टी अपूर्व सृष्टि [गुपचुप]’/ • स्मृति दत्त ने ‘एक पृथ्वी भालो बासा’, वेलंनटाइन डे के उपलक्ष्य पर ‘प्रेम मास फरवरी’ और ‘पुस्तक मेला शरदचंद्र’/ • पल्लव चटर्जी ने बांग्ला में छोटी-छोटी गंभीर कविता का पाठ किया, शीर्षक था- ‘वेलंनटाइन डे’, ‘बांदोर नाच’ [बंदर नृत्य] और ‘मानवता’/ • दुलाल समाद्दार ने ‘जोखोनई भेंगेछे घूम भोर’ [जब नींद खुली सुबह-सुबह], ‘मेएदेर हाथ बैग’ [लड़कियों का हाथ में पर्स]/ • ब्रजेश मल्लिक ने ‘पुचका चाटेर ठेला’ [गुपचुप वाला ठेला] एवं ‘मजदूर’ और अंत में • वीरेंद्रनाथ सरकार ने ‘मृत्यु’ की परिभाषा को अत्यंत सुंदर ढंग से चित्रण किया एवं राष्ट्र कवि रामधारी सिंह दिनकर की एक कविता ‘धन संपत्ति’ को पढ़कर सुनाया.
• ‘आड्डाबाज़’ -114 की कुछ सचित्र झलकियाँ-

👉 • ‘आड्डाबाज़’ में उपस्थित सक्रिय सदस्य

👉 [बाएँ से] • दुलाल समाद्दार, वीरेंद्रनाथ सरकार, रतन सरकार, कृष्णचंद्र रॉय और रविंद्रनाथ देबनाथ

👉 [बाएँ से] • जीबोन हालदार, आलोक कुमार चंदा, ब्रजेश मल्लिक, प्रदीप भट्टाचार्य और प्रकाशचंद्र मण्डल

👉 • स्मृति दत्त

👉 • प्रदीप भट्टाचार्य

👉 • ब्रजेश मल्लिक

👉 • प्रकाशचंद्र मण्डल

• कविता पाठ करते हुए स्मृति दत्त और प्रदीप भट्टाचार्य

👉 • पल्लव चटर्जी
आभार व्यक्त कृष्णचंद्र रॉय ने दिया
[ • रपट- प्रदीप भट्टाचार्य और फोटो क्लिक- पल्लव चटर्जी ]
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