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‘जनवादी लेखक संघ’ : छत्तीसगढ़ में मनाया गया ‘जलेस’ का स्थापना दिवस : स्थापना के 45 वर्ष पूर्ण होने पर रायपुर-भिलाई में हुआ काव्य पाठ

👉 • ‘जनवादी लेखक संघ’ दुर्ग-भिलाई [बैठे हुए, बाएँ से] सोनिया नायडू घोष, डॉ. बीना सिंह रागी, लोकबाबू, परमेश्वर वैष्णव, उमेश कुमार, मीता दास [खड़े हुए, बाएँ से] व्ही अप्पा राव, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, बाबू राव, प्रकाशचंद्र मण्डल, ब्रजेश मल्लिक, राकेश बम्बाड़े, मुमताज, हाजी रियाज़ खान गौहर, एल. रुद्रमूर्ति और प्रदीप भट्टाचार्य
जनवादी लेखक संघ की स्थापना के 45 साल पूर्ण होने पर रायपुर और भिलाई में काव्य गोष्ठियों का आयोजन किया गया। इन आयोजनों में क्रमशः जलेस के राज्य सचिव पूर्णचंद्र रथ और कोषाध्यक्ष मुमताज ने 14 फरवरी 1982 को बांदा में हुए पहले स्थापना सम्मेलन से आज तक के इतिहास पर चर्चा की और बताया कि आपातकाल के बाद किस तरह के हालातों में प्रलेस की नीतियों से निराश होकर विचारशील रचनाकारों को एकजुट हो कर एक नया संगठन बनाना पड़ा। इस अवसर पर उन्होंने जल, जंगल और जमीन से जुड़ी तथा राजनैतिक रुझान की अपनी कविताओं का पाठ भी किया।
रायपुर में नवोदित युवा कवि आरभी झा तथा ऋचा रथ सहित स्टेट वर्किंग जर्नलिस्ट्स यूनियन, छत्तीसगढ़ से जुड़ी महिला पत्रकारों ने काव्यपाठ किया, जिसमें आफ़ताब बेग़म, भावना झा, सैयद सलमा, सुजाता साहा, अनुराधा गुप्ता आदि विशेष रूप से शामिल थीं। वरिष्ठ कवि और उपन्यासकार डॉ नंदन ने गोष्ठी की अध्यक्षता की।
आरभी झा ने अपनी परिपक्व कविताओं से पहले की और आज की पत्रकारिता का अंतर स्पष्ट किया। ऋचा रथ ने अपनी स्त्री केंद्रित कविताओं में घर-परिवार के प्रति समर्पित होने और स्वयं के सपनों के लिए संघर्ष करती स्त्रियों का दर्द रखा। अनुराधा गुप्ता ने अपनी उम्र के चार दशक पूरी करते जा रही स्त्री के अधूरे अरमानों को कविता में व्यक्त किया। आफ़ताब बेगम की ग़ज़लों में गुलाबों की बगिया में भी कांटों की बजाय फूलों से खरोंच आने के बिंबों से अपनी बात कही गयी। सैयद सलमा ने अपनी छोटी-छोटी कविताओं से समाज में एक स्त्री के समक्ष उपस्थित स्थितियों को रेखांकित किया। कार्यक्रम में सबसे वरिष्ठ प्रतिभागी प्रेम मुंडेजा ने आज के समय में हो रहे नए-नए अनुभवों पर केंद्रित अपनी बात कविताओं के माध्यम से की।

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भिलाई में बहुभाषीय काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ-
भिलाई के काव्य गोष्ठी में चर्चित उपन्यास ‘बस्तर बस्तर’ के लेखक लोकबाबू की अध्यक्षता में ‘छत्तीसगढ़ प्रगतिशील लेखक संघ’ के राज्य महासचिव परमेश्वर वैष्णव मुख्य अतिथि थे. विशिष्ट अतिथि बिहार राज्य ‘जलेस’ के कार्यकारिणी सदस्य उमेश कुंवर, छत्तीसगढ़ राज्य ‘जलेस’ के उपाध्यक्ष राकेश बम्बाड़े और डॉ. बीना सिंह रागी.
प्रारंभ में ‘जनवादी लेखक संघ’ भिलाई-दुर्ग के अध्यक्ष मुमताज ने ‘जलेस’ के स्थापना दिवस की जानकारी दी और काव्य गोष्ठी का संचालन किया.
कवि गोष्ठी में हिंदी, उर्दू, बंगाली, तेलगु भाषा में उपस्थित कवियों ने काव्य पाठ किया.
प्रदीप भट्टाचार्य, प्रकाशचंद्र मण्डल, ब्रजेश मल्लिक, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी ‘सब्र’, हाजी रियाज़ खान गौहार, व्ही अप्पा राव, सोनिया नायडू घोष, डॉ. अंजन कुमार, मीता दास, एल. रुद्रमूर्ति और बाबूराव ने कविता का पाठ किया.
अतिथियों ने भी अपनी-अपनी रचनाओं का पाठ किया.
लोकबाबू ने भी अपने विचार रखे.
इस अवसर पर मनोरंजन दास, प्रशांत सिंह, रविकांत मंडामे और डॉ. एके सिंह उपस्थित रहे.
आभार व्यक्त ‘जलेस’ भिलाई-दुर्ग के सचिव एल. रुद्रमूर्ति ने दिया.
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