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सम्मान : वीरांगना रानी दुर्गावती की स्मृति में दिया जाने वाला ‘नारी शक्ति सम्मान’ इस वर्ष डॉ. भावना दिवाकर को दिया गया

👉 • डॉ. भावना दिवाकर नारी शक्ति की वास्तविक परिभाषा है. 23 जुलाई 1983 को मध्यप्रदेश की संस्कारधानी नगरी जबलपुर में जन्मी छत्तीसगढ़ दुर्ग की बहू है.
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नारी साहस, स्वाभिमान और संघर्ष की अमर प्रतीक वीरांगना रानी दुर्गावती की स्मृति में प्रदान किए जाने वाले प्रतिष्ठित नारी शक्ति सम्मान से इस वर्ष डॉ. भावना दिवाकर को अलंकृत किया गया। यह सम्मान समता साहित्य अकादमी, छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा रामजानकी सामुदायिक भवन, कुशालपुर, रायपुर में आयोजित भव्य एवं गरिमामयी समारोह में प्रदान किया गया। राज्य-स्तरीय इस सम्मान ने डॉ. भावना दिवाकर के उन कार्यों को मान्यता दी है, जो समाज में नारी शक्ति को केवल शब्द नहीं, बल्कि जीवंत वास्तविकता बनाते हैं।

डॉ. भावना दिवाकर का कार्य नारी शक्ति की वास्तविक परिभाषा है। वे समाज में नई ऊर्जा और स्पष्ट दिशा प्रदान कर रही हैं। ऐसे व्यक्तित्व केवल वर्तमान को सशक्त नहीं करते, बल्कि भविष्य की नींव भी रखते हैं। शिक्षा, संस्कार, संगठन और समाज सेवा—इन सभी क्षेत्रों में उनका योगदान यह सिद्ध करता है कि जब नारी नेतृत्व करती है, तो समाज स्वतः आगे बढ़ता है।
23 जुलाई, 1983 को मध्यप्रदेश के जबलपुर नगर में जन्मी भावना ने उसी धरती की माटी में आँखें खोलीं, वहीं माँ-पिता के आँगन में पली-बढ़ीं और वहीं से जीवन के संस्कार, शिक्षा और आत्मबल की पहली सीख प्राप्त की। उनके पिता स्वर्गीय नारायण गवई एवं माता स्वर्गीय कमला गवई ने उन्हें बचपन से ही सत्य, संवेदना, अनुशासन और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का भाव दिया। यही संस्कार उनके जीवन की नींव बने और उन्हें समाज सेवा एवं नेतृत्व के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली।
विवाह उपरांत उनका जीवन छत्तीसगढ़ की धरती से जुड़ गया। आज वे दुर्ग जिले की बहू के रूप में न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र का मान बढ़ा रही हैं। वर्तमान में उनका निवास बोरसी, जिला दुर्ग में है और वे श्री राकेश दिवाकर की धर्मपत्नी हैं। इस प्रकार जबलपुर की जन्मभूमि में जन्म लेकर दुर्ग की कर्मभूमि पर कार्य करते हुए, डॉ. भावना दिवाकर दोनों ही अंचलों को समान रूप से गौरवांवित कर रही हैं। यह उपलब्धि जबलपुर के लिए भी गर्व का विषय है और दुर्ग के लिए भी हर्ष का क्षण।
परिवार, समाज और कार्यक्षेत्र—तीनों के बीच संतुलन बनाते हुए डॉ. भावना दिवाकर शिक्षा के क्षेत्र में भी सशक्त भूमिका निभा रही हैं। वे वर्तमान में दानवीर तुलाराम महाविद्यालय में सहायक प्राध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। एक आदर्श शिक्षिका के रूप में वे केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विद्यार्थियों को जीवन मूल्य, नैतिकता, आत्मविश्वास और सामाजिक चेतना से जोड़ने का कार्य भी कर रही हैं। वे उस गुरु-शिष्य परंपरा की सशक्त प्रतिनिधि हैं, जहाँ शिक्षक केवल ज्ञानदाता नहीं, बल्कि चरित्र निर्माता होता है।
विद्यार्थियों के बीच उनकी पहचान एक संवेदनशील, मार्गदर्शक और प्रेरक शिक्षिका के रूप में है। वे शिक्षा को केवल डिग्री का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण का मजबूत आधार मानती हैं। कक्षा से लेकर मंच तक, उनका हर प्रयास युवाओं को सकारात्मक दिशा देने का कार्य करता है।
डॉ. भावना दिवाकर सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं से भी सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं। वे वर्तमान में आदिशक्ति हिंदू युवा मंच की जिला संयोजिका के रूप में कार्य कर रही हैं, जहाँ वे महिला जागरूकता, सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक मूल्यों और युवा चेतना को सशक्त करने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। संस्थाओं के माध्यम से वे समाज के हर वर्ग तक संवाद, संस्कार और चेतना पहुँचाने का कार्य कर रही हैं।
महिलाओं के अधिकार, समानता, सुरक्षा, शिक्षा और आत्मनिर्भरता को लेकर उनका सतत प्रयास समाज में नई सोच और सकारात्मक परिवर्तन का आधार बन रहा है। शिक्षा, संगठन और समाज सेवा—इन तीनों क्षेत्रों में एक साथ सक्रिय रहना उनके दृढ़ संकल्प और कार्यक्षमता का प्रमाण है।
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि डॉ. भावना दिवाकर जैसे व्यक्तित्व समाज के लिए दिशा-सूचक होते हैं। वे वर्तमान में सक्रिय रहकर भविष्य की पीढ़ी को गढ़ने का कार्य कर रही हैं। उनका कार्य केवल आज के लिए नहीं, बल्कि आने वाले समय के लिए भी प्रेरणास्रोत है।
सम्मान ग्रहण करते हुए डॉ. भावना दिवाकर ने इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता, गुरुजनों एवं परिवारजनों को देते हुए कहा कि यह सम्मान उनके लिए प्रेरणा के साथ-साथ एक बड़ी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने यह भी कहा कि वे आगे भी शिक्षा, समाज सेवा और नारी सशक्तिकरण के कार्यों को पूरे समर्पण और निष्ठा के साथ निरंतर आगे बढ़ाती रहेंगी।
वीरांगना रानी दुर्गावती की स्मृति में मिला यह सम्मान इस बात का प्रतीक है कि आज की नारी भी उसी परंपरा को आगे बढ़ा रही है, जहाँ साहस, संस्कार, सेवा और नेतृत्व एक साथ चलते हैं। 23 जुलाई 1983 को जबलपुर की माटी में जन्मी भावना का यह सफर आज राज्य-स्तरीय सम्मान तक पहुँचना, न केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि जबलपुर की जन्मभूमि और दुर्ग की कर्मभूमि—दोनों के लिए गौरव का विषय है।

[ • प्रेषित प्रेस न्यूज़ : कैलाश जैन बरमेचा ]
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