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विश्व प्रसिद्ध कृति आत्मकथा ‘आलो आंधारी’ की लेखिका बेबी हालदार का छत्तीसगढ़ [भिलाई] आगमन पर उनका ‘बंगीय साहित्य संस्था’ ने आत्मीय स्वागत किया

👉 • ‘वुमन इंस्पिरेशन’ ख्याति प्राप्त लेखिका बेबी हालदार का कहना है कि ‘जीवन में संभावनाओं को हमेशा ढुंढते रहना चाहिए. बेहतर कल के लिए सपनों की चाहत भी होनी चाहिए, तभी खुद को साबित कर सकेंगे’
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भिलाई [प्रदीप भट्टाचार्य] : बेबी हालदार एक प्रेरणादायक भारतीय लेखिका हैं, जिनकी जीवन-कहानी संघर्ष, साहस और आत्मविश्वास का अद्भुत उदाहरण है. 1973 में जम्मू कश्मीर में जन्मी बेबी हालदार ने बचपन से ही अनेक कठिनाइयों का सामना किया. कम उम्र में शादी हुई. घरेलू हिंसा एवं गरीबी जैसी परिस्थितियों के कारण जीवनयापन के लिए घरेलू कामगार के रूप में काम किया.
दिल्ली में काम करते वक्त उनके नियोक्ता ने बेबी हालदार की रुचि को पहचाना और उनको अपनी जीवन कहानी लिखने के लिए प्रेरित किया और फिर बांग्ला में लिखी आत्मकथा ‘आलो आंधारी’ [Darkness and Light/अंधेरा और उजाला] का जन्म हुआ. इस पुस्तक में उन्होंने अपने संघर्षपूर्ण जीवन को सच्चाई और साहस के साथ प्रस्तुत किया. ‘आलो आंधारी’ की लोकप्रियता का यही प्रमाण है कि यह पुस्तक अंग्रेजी में ‘A Life Less Aandhari’ [ए लाइफ लेस ऑर्डिनरी] अनुवादित हुई. अनुवाद किया उर्वशी बुटालिया [जुबान प्रकाशन, 2006]. बेबी हालदार की यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि हालात कैसे भी हों! अपने सपनों को नहीं छोड़ना चाहिए. सपनों को जीवंत रखना चाहिए, जीवन समाज के लिए प्रेरणा है और यह सिखाता है कि दृढ़ संकल्प और हिम्मत से कोई भी व्यक्ति अपने जीवन की दिशा बदल सकता है. ‘आलो आंधारी’ 29 भाषाओं में अनुवादित/प्रकाशित हुई.
बेबी हालदार की लिखी हुई काव्य ग्रंथ ‘कोबे आमी बाहिर होलेम’ में 3 कृति शामिल है.
प्रथम- आलो आंधारी [बांग्ला]
द्वितीय- एशत रूपांतरण [बांग्ला]
तृतीय- घरे फेरार पथ [बांग्ला में आत्मकथात्मक]
छत्तीसगढ़ [भिलाई] में विश्व का सबसे जग प्रसिद्ध स्टील प्लांट है. भिलाई में बहुभाषीय लोग रहते हैं. यहाँ हिंदू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई सब धर्म के लोग मिलजुल कर रहते हैं और सब धर्मों का सम्मान करते हैं. मेहमाननवाज़ी यहाँ कूट-कूट कर भरी है. कला, संस्कृति और साहित्य में भिलाई की एक पहचान है. बंगाली भाषा को भिलाई में स्मृद्ध करने और बंगाल की सांस्कृतिक विरासत को यहाँ बनाए रखने के लिए 65 वर्ष पहले ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की नींव रखी गई थी. संस्था के संस्थापक सदस्य स्व. शिबव्रत देवानजी और डॉ. भवानी प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में इस संस्था की गठन किया गया था. संस्था द्वारा एक बांग्ला भाषा में साहित्यिक पत्रिका ‘मध्यबलय’ का नियमित प्रकाशन होता है. ‘मध्यबलय’ को अनेकों राष्ट्रीय पुरुस्कार भी प्राप्त हो चुका है. वर्तमान में ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की वर्तमान सभापति व बांग्ला कवयित्री श्रीमती बानी चक्रवर्ती, उप सभापति व बांग्ला कवयित्री श्रीमती स्मृति दत्त एवं श्रीमती दीपाली दासगुप्ता, महासचिव शुभेंदु बागची, उपसचिव प्रकाशचंद्र मण्डल, कोषाध्यक्ष पल्लव चटर्जी और संपादक दुलाल समाद्दार हैं. बीते दिनों 09 मार्च,2026 को कोलकाता से सुप्रसिद्ध लेखिका बेबी हालदार का साहित्य की संस्कारधानी लौहनगरी ‘भिलाई’ में आगमन हुआ. ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की सभापति बानी चक्रवर्ती के नेतृत्व में और बंगीय सभी सदस्यों द्वारा बेबी हालदार का भव्य स्वागत अभिनंदन किया गया.

👉 • ‘बंगीय साहित्य संस्था’ ने बेबी हालदार का स्वागत अभिवादन किया…

👉 • ‘बंगीय साहित्य संस्था’ ने शॉल,श्रीफल और मोमेंटो प्रदान कर बेबी हालदार का स्वागत किया…

👉 • बांग्ला कवि विपुल कुमार सेन की प्रथम काव्य संग्रह ‘स्वप्न सीडी’ का लोकार्पण बेबी हालदार के करकमलों से किया गया

👉 [बाएँ से] • स्मृति दत्त, बानी चक्रवर्ती और बेबी हालदार

👉 [बाएँ से] • ब्रजेश मल्लिक, प्रकाशचंद्र मण्डल, विपुल सेन, जीबोन हालदार, बेबी हालदार और सुजॉशा सेन

👉 [बाएँ से] • दुलाल समाद्दार, बेबी हालदार और विपुल सेन

👉 • राष्ट्रवादी कवि ब्रजेश मल्लिक और बेबी हालदार

👉 [बाएँ से] • बांग्ला कवि जीबोन हालदार, लेखिका बेबी हालदार और बांग्ला कवि विपुल सेन

👉 • ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की सभापति एवं बांग्ला की चर्चित लेखिका व कवयित्री बानी चक्रवर्ती और बांग्ला की ख्यातिप्राप्त लेखिका बेबी हालदार

👉 [बाएँ से] • बेबी हालदार, रीना विश्वास और प्रकाशचंद्र मण्डल

👉 • ‘वुमन इंस्पिरेशन’ लेखिका बेबी हालदार के साथ ‘बंगीय साहित्य संस्था’ की उप सभापति एवं बांग्ला की चर्चित कवयित्री दीपाली दासगुप्ता
[ • रिपोर्टिंग-संयोजन : प्रदीप भट्टाचार्य, फोटो साभार- प्रकाशचंद्र मण्डल, ब्रजेश मल्लिक]
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