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■स्वरुपानंद महाविद्यालय,भिलाई-छत्तीसगढ़ में इकेबाना कार्यशाला.
छत्तीसगढ़ । भिलाई ।
स्वामी श्री स्वरुपानंद सरस्वती महाविद्यालय, हुडको-भिलाई द्वारा ‘अंकुरण इकाई’ के सौजन्य से सूखे फलए फूलए टहनी एवं अनुपयोगी सामानो से कलात्मक पॉट, गुलदस्ता, झूमर एवं फाउन्टेन बनाने की कार्यशाला का आयोजन किया गया।
अंकुरण ईकाई कि संयोजिका श्रीमती सुनीता शर्मा ने बताया कि हम अपने आस-पास कि सुखे फल, फूल, टहनी, पत्तियों से सुंदर सजावट के सामान बना सकते है आजकल हॉटल एवं घर के इंटिरियर को इन सामानो से सजाया जाता है इसी परिपेक्ष्य में इस कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।
श्रीमती सुनीता शर्मा एवं अंकुरण इकाई के सदस्य श्रीमती उषा साहू, सुश्री सुपर्णा भक्ता सहायक, सुश्री जानकी जंघेल ने सूखे फल फूल पत्ती टहनी आदि के साथ पुराने मटके अनुपयोगी वस्तु का उपयोग कर फाउन्टेन, फ्लावर पॉट, गुलदस्त, चिडिया आदि बनाना सिखाया। प्राकृतिक अपशिष्ट से बनी यह वस्तुये रचनात्मक कल्पनाशिलता का परिचय देती है।
महाविद्यालय के सीओओ डॉ. दीपक शर्मा ने कहा कि प्राचीन समय में सूखे फल पत्ती से खाद बनाया जाता था महाविद्यालय द्वारा उनका प्रयोग कलात्मक एवं सजावटी सामान बनाने में किया जा रहा है जो अुनपयोगी वस्तुओं का रचनात्मक उपयोग कैसे किया जाये इस दिशा में एक रचनात्मक पहल है।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ हंसा शुक्ला ने कहा कि वेस्ट मटेरियल से सजाने की वस्तु बनाकर घर को सजाना एक अलग खुशी देता है। सूखे फल, फूल, पत्ती, टहनी का पुर्नउपयोगी यह पर्यावरण सुरक्षा के लिए एक सार्थक प्रयास है। प्रत्येक व्यक्ति एवं वेस्ट मटेरियल से एक सजावटी का सामान बनाकर अपने घर को सजाये तो इससे वातावरण में प्रदूषण कम होगा। गन्दगी नही होगी एवं घर भी सजाया जा सकता है।
[ प्रेस नोट समाचार डेस्क,’छत्तीसगढ़ आसपास’. प्रिंट एवं वेबसाइट वेब पोर्टल, न्यूज़ ग्रुप समूह,रायपुर, छत्तीसगढ़. ]
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