■रक्षा बंधन विशेष : ■डॉ. नीलकंठ देवांगन.
●सौगात.
-डॉ. नीलकंठ देवांगन.
[ शिवधाम कोडिया,छत्तीसगढ़ ]
मौन प्रतीक्षा के पश्चात्
आया अब स्वर्णिम प्रभात
प्यार देने प्यार पाने
पुलकित है भाई का गात
बहन भी खुश तिलक लगाने
आरती राखी बांधने
मिठाई मंगल भावना एवज में
स्नेह रक्षा संकल्प भाव पाने
स्नेह बिन्दु अब पा लिया
अनंत सागर सा विस्तार
नेह धार अब बह चला
पावन गंगा सा साकार
पवित्र प्रेम का बंधन है
भावों के दीप में पुलकन
आपसी प्रेम का अनुरंजन है
यादों के मोर में फ़ुदकन
मंगल कामना करूं मैं तेरी
हर्षित पुलकित मन से
अर्पण करूं मैं सारी खुशियां
अपने अंतर्तम से
नेह ज्योति जलती रहे
जीवन ज्योति के साथ
दिव्य अनुभूति जगती रहे
अनुभवी संकल्प के साथ
स्नेह दीप जो जले हैं
अंतर्मन में तेरे मेरे
सद्भाव स्नेह और विश्वास
की किरणें घनेरे
झलके दिव्य आभा अनुपम
अंधकार में ऐसे
छलके शुभ्र ज्योत्सना निर्मल
तम के घट में जैसे
अलंकृत हो जीवन हर पल
हंसते गाते बीते
सौभाग्यवती बन सदा सुहागन
संग प्राण पिरीते
स्नेह दीप बुझने न पाये
रखना इसका ख्याल
राखी के दिन ज्योतिर् करने
आ जाना हर साल
स्पंदित मधुर स्मृतियों को
संजोये रखूंगा साल भर
स्फुरित और जागृत कर देना
इस दिन राखी बांध कर
हवा बहे चाहे कैसी भी
रखना तुम विश्वास
जब भी मुझको याद करोगी
पाओगी अपने पास
●कवि संपर्क-
●84355 52828
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chhattisgarhaaspaas
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