■रक्षा बंधन विशेष : ■विनीता सिंह चौहान.
●राखी.
-विनीता सिंह चौहान.
[ इंदौर-मध्यप्रदेश ]
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आया रंगीला सावन, त्यौहार सजे आंगन,
लेकर मन में आस, अहसास जगाया।
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ढूंढूं काले बादलों में, भीगे भीगे सपनों में,
रिश्तो का ताना-बाना, रक्षाबंधन अाया।
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छूटा मेरा बचपन, पीहर संग त्यौहार,
बहन बैठी उदास, राखी का दिन आया।
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राखी सजाए भाई की,बहन निहारे राह,
सावन की बूंदे बन, अश्रु नीर बहाया।
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कौन देश ब्याहा मुझे, बहन कहे भाई से,
बरसों बीते अकेले, राखी में भाई आया।
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आएंगे अबकी बार, सावन में मेरे वीर,
खुशियों की बूंदे बन, फुहारें बरसाया।
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धागों के रिश्तो में सजे, भाई बहन का प्यार,
रोली टीका व अक्षत, आज भाल सजाया।
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आया रंगीला सावन, त्यौहार सजे आंगन,
खुशियों की बूंदे बन, राखी का दिन आया।
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●कवयित्री संपर्क-
●94245 12974
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