■रक्षा बंधन विशेष : ■ललित पाल सिंह अर्कवंशी.
●राखी की लाज बचानी है.
-ललित पाल सिंह अर्कवंशी.
[ हरदोई-उत्तरप्रदेश ]
दुनिया की सभी बहनों के,चरणों में मेरा बंदन है।
भाई बहन के प्यार का ,त्योहार यह रक्षाबंधन है ।।
कर्णावती पर संकट आया,हुमायूं को भेजी राखी।
लड़ के युद्ध शाह से उसने ,लाज राखी की राखी ।।
राजा बलि की कलाई पर, लक्ष्मी नें बाँधी राखी।
विष्णु को लेकर के आयीं, प्रचलित कर दी राखी।।
सिकन्दर की पत्नी ने, राजा पुरु के बाँधी राखी।
जीवनदान सिकंदर को दे,अमर कर दी ये राखी।।१।।
राखी रेशम की कोई डोर नही,वचनों का बंधन है।
भाई बहन के प्यार का, त्योहार यह रक्षाबंधन है।।
हल्दी, अक्षत रोली ले,पहले तिलक करती बहना।
कलाई पर राखी बांध,रक्षा का वचन लेती बहना।।
आसमां से ऊंची ,सागर से गहरी, होती है बहना।
अमूल्य प्रेम स्नेह दुलार दे, कुछ न लेती है बहना।।
गंगा जैसी पवित्र हृदय की, होती है प्यारी बहना।
राखी की कीमत वह जाने,जिसके न कोई बहना।।२।।
कुछ भाई नांग विषधारी,बहना सबकी चन्दन हैं।
भाई बहन के प्यार का, त्योहार यह रक्षाबंधन है।।
भविष्य न उज्ज्वल दीख रहा,कलाई लगती सूनी है।
मानव ने दानव रूप लिया,हो रहा खेल अब ख़ूनी है।।
लड़की की भूर्ण हत्या कर, लड़कों में खुशी दूनी है।
कुछ दिन ये स्थिति और रही,बहनें तो कम होनी है।।। वचन निभा संघर्ष करो, बहनों को जिन्दगी देनी है।
प्रण कर भाई रक्षा करें, राखी की लाज बचानी है।।३।।
न जन्म से पहले मरे बहना, सबसे मेरा बंदन है ।।
भाई बहन के प्यार का, त्योहार यह रक्षाबंधन है।।
●कवि संपर्क-
●97926 85856
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