■कविता आसपास. ■प्रकाश चंद्र मण्डल.
4 years ago
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♀ प्रेम कल्पनातीत.
♀ प्रकाश चंद्र मण्डल.
【 भिलाईनगर,दुर्ग,छत्तीसगढ़ 】
जीवन के आपाधापी का बेड़ा पार कर
मैं खुद को एक अपरिचित
देश में ले जाता हूं
जहां नहीं है किसी से बैर
न मारामारी न मार काट
जहां है सिर्फ भाई के साथ भाई का
राम -भरत जैसा मेल
वहीं पर मन जाना चाहता है,
जहां रहेगा सिर्फ पक्षियों का गुंजन
पेड़ों के हरे भरे पत्तियों का
हिलता हुआ हृदय का आव्हान
उन्मुक्त आकाश में चांदनी के
रोशनी में-
खुद को न्यौछावर करने को
मन चाहता है,
फूलों के सौरभ से मतवाला भौंरे
वन के हरे अंगना में
विचरण करता हिरण जैसा
उछल-कूद करते
मन चाहता है।
प्रिय बन्धु , तुम्हारे प्रेम को
किसी अंधेरे कोठरी में
बंदी बनाकर मत रखना
चले आओ वहां किसी निर्जन में
खुले आसमान के नीचे
जहां तुम्हारा मन चाहता है।
■कवि संपर्क-
■94255 75471
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chhattisgarhaaspaas
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