■गीत : डॉ. सुनीता सिंह ‘सुधा’ [वाराणसी].
4 years ago
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♀ गीत चिंतन के…
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गीत चिंतन के चमन में
फूलता फलता रहा ।
भाव-गंगा में नहाकर
होंठ पर सजता रहा ।।
प्रीति पुलकित स्वाति बूँदे
सज रहा श्रृंगार तन।
नेह आलोकित किरण-सा
बन गए दर्पण नयन।।
पुष्प सुरभित पंख झलमल
सूर्य सा उगता रहा ।
गीत चिंतन के………..।।
हर्ष- अभिलाषा हृदय में
चित्त को मधुवन करे ।
शुभ्रता-संगीत सुंदर
नित्य नव जीवन धरे ।।
स्वर तरंगित मन अलंकृत
मौन भी हँसता रहा ।
गीत चिंतन के ……..।।
कह व्यथा मन से हृदय की
धैर्य अंतस् में धरे
मार्ग सच्चा यह दिखाए
आस नव संचित करे ।
शब्द गढ़कर स्वर सुशोभित
ज्वाल-सा जलता रहा ।
गीत चिंतन के……….।।
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chhattisgarhaaspaas
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