कविता आसपास : दिलशाद सैफी [रायपुर छत्तीसगढ़ ]
3 years ago
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🌸 सीलन
दीवारों पे लगे सीलन सा है
मेरा प्रेम
जो एक बार चढ़ गया तो फिर
चढ़ गया
ख़ामोशी के साथ घुसपैठ
किया है मैंने
तुम्हारे शरीर को आवरण बना
ढाँक लिया
और अंत तक तुम्हें खुद में
विलीन कर लूँगीं
जब – जब लोंग तुम्हें देखेंगे
मैं सिर्फ़ मैं
ही नज़र आऊँगी तुझमें
तुम चाहे
कितने भी जतन कर लो
नहीं हटेगा ये
इसके लिए तोड़ना होंगा तुम्हें
मेरी प्रतीति को
बदलना होगा भावनाओं की
क्षतिग्रस्त ईटे और
नये सिरे से डालनी होगी नींव
तब कहीं जाकर
ठहर जाये शायद ये “सीलन”
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•62678 61179
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chhattisgarhaaspaas
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