इस माह के कवि : डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय [केंद्रीय विद्यालय, वेंकटगिरी, आंध्रप्रदेश]
🌸 मां
मां धीरे-धीरे
अनुपयोगी होती जा रही है
अपनों के लिए
उच्छिष्ट अन्न की तरह।
मां का नहीं रहा नियंत्रण
अपने हाथों पर
अनन्य आत्मीयों की तरह।
मां के अपने
कान-आंख
दिल-दिमाग
सब छोड़ रहे हैं साथ
अपने प्रियजनों की तरह।
मां रीत गई है अब
बहुत अंदर तक
कोई नहीं तलाशता स्वर्ग
उसकी गोद में
फसल पर तुषारापात की तरह।
मां का अतीत
भविष्य -वर्तमान
सब कुछ सिमट गया है
छ: भाई छः की पलंग पर
कंगारू के बच्चे की तरह।
मां अपने आस-पास
कांपते हाथों से टटोलती है
अंतर्मन में रिश्तों को
माला फेरते भक्त की तरह।
मां की नीली शिराओं के
जाल वाले कांपते हाथ
सदा से कीमती रहे हैं मेरे लिए
खोए हुए ख़ज़ाने की तरह।
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🌸 विडम्बना
फ्लैट की खिड़की से
टूटे पत्ते-सा छांकता मन
कभी ऐसे ही लहराया
गांव की पगडंडी पर
डगमगाता लट्टू मन
शहर आया ।
छोड़ आया गौरैया
बबुरहनी और लग्गी
डीहबाबा और पोखरा
माई की ड्योढ़ी
बाबू के खेत
चरनी पर बैलों की गोंई
दुआरे का नीम और
टांग आया मन
बबूल की डाली पर
लटते बया चिरइय्या के खोंता में।
बहुत दिनों तक
मन की मर्मर को
जीवन-संगीत समझा
ओह!वो था
डाल से टूटना
सूखना,पद मर्दित होना
समेटना,फूंकना और
बस धुंआना-गुंगुवाना
बस और बस
अपनी पहचान खोना।
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🌸 मौन साधना में सरकारें
मौन साधना में सरकारें,
लोकतंत्र की घाटी पर।
लाचार पड़े हैं जुम्मन चाचा
इसी भूमि की माटी पर।।
हर कुर्सी पर लक्ष्मी वाहन
,घर – घर में बेकारी है ।
बिना काम का युवा घूमता
सत्ता निश्चित व्यभिचारी है।।
अरहर की टट्टी पर देखो
गुजराती ताला लगा दिया।
रोजी -रोटी जनता चीखे
देश को आगे बढ़ा दिया।।
सब्जबाग के क्या कहने
दिन में हैं तारे दिखलाते ।
अपने मुंह मियां मिट्ठू बन
खुद का है परचम लहराते ।।
जिसने हाथ में लाठी थामी
भैंस वहीं ले जाता है।
प्रजातंत्र के गलियारे को
बस चारागाह बनाता है ।।
नंगा होता खुदा से बंगा
लेता रहता हर पल पंगा।
फिसल पड़े की हर गंगा में
ढोल-पोल बिच है सब नंगा।।
कुछ उसकी आंखों के तारे
कुछ फूटी आंख पड़े हैं न्यारे।
कुछ आंखों की बने किरकिरी
जेल बीच बैठे बेचारे।।
अहंकार मतवाला हाथी
दुष्कर्मों के जाल बुनें ।
अंधा पीसे कुत्ता खाये
ऐसे सत्ता का खेल बने।।
मरा समझ तुरत फुरत ही
कब्र खोदकर दफ़नाया ।
भूत भूत है अब चिल्लाते
हर जुलूस में मुझको पाया।।
मौन साधना में सरकारें
लोकतंत्र की घाटी पर।
न्याय पड़ा लाचार सिसकता
भारत भूं की माटी पर।।
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•संपर्क –
•98265 61819
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chhattisgarhaaspaas
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