इस माह की कवियित्री : संध्या श्रीवास्तव [भिलाई छत्तीसगढ़]
🌸 प्रिये

जो तुम होते साथ प्रिये
होती मन की बात प्रिये
सारी दुनिया से बेख़बर
होता हाथों में हाथ प्रिये
जुड़ जाते मन से मन के तार
पतझड़ में आ जाती बहार
खिल खिल जातीं कलियां हज़ार
होती हृदवीणा में झंकार प्रिये
जो तुम आ जाते मेरे द्वार प्रिये
लेकर तारों की बारात प्रिये
तारिकाएँ करतीं मेरा श्रृंगार
शुभ गीतों की होती झंकार प्रिये
दूर कहीं से स्वर मचलते
सुर किसी के उर में सजते
झूम झूम गाती बहार
जो तुम होते मेरे साथ प्रिये
महकती चंदन जैसी तरंग
पगलाई पवन बहती गगन
कोयल बागों में कुहकती
जो तुम होते मेरे साथ प्रिये
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🌸 ठूंठ

मैं एक़ बूढ़ा पेड़ अकेला
रूखा सूखा खड़ा खड़ा
कैसे वृक्ष राज से ठूंठ बना।
याद करूँ मैं रो रो कर
खोया हुआ अपना अतीत
दानवीर दरख़्त था मैं
बन गया बूढ़ा फ़क़ीर
कैसी चली ये जग़ की रीत
कहीं नहीं है दुःख की लकीर
ये दिन सब पर आटा है
जीवन यथार्थ लिख जाता है
विगत क्यू पद चीन्हों पर ही
आगत कदम बढ़ाता है
जब मैं था नन्हा पौधा
उपवन की क्यारी का
नन्हें बच्चे खेले संग संग
देता झोंका ख़ुशियाली का
प्यार मैं न्योछावर होकर
दिये फल फूल संग डाली
फिर देकर अपनी हड्डी पसली
बना ठूंठ हुई बदहाली
मैं बूढ़ा एक पेड़ अकेला
अवश विवश मजबूर बना
ऐसे वृक्षराज से ठूंठ बना।।
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🌸 जल संरक्षण के लिये

चलो चलाएँ नदी अभियान
चलो चलाएँ नदी अभियान
नदियों में हम फुक़ें जान
क़ूल कझारो में वृक्ष लगाकर
जन इन का हम करे कल्याण
चलो चलायें नदी अभियान
तीरे तीरे नाड़ियों के हम
सजाते चलें पुष्पित बाग़ान
आगे लगे वन ओषधियों के
हरियाते रहें खेत खलिहन
नदियों के तीरे वन हो रक्षित
बाघ हिरण पशु पक्षी हर्षित
अभयारण्य में रहें सुरक्षित
करें पवन जल का पान
बूँद बूँद ना तरसे जीवन
पावन नदियाँ तोड़ें ना दम
नादिया रहें संविधान संरक्षित
ख़ुदकुशी करे ना कोई किसान
चलो चलायें नदी अभियान.
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•संपर्क –
•99813 01586
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chhattisgarhaaspaas
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