कविता आसपास : गोविंद पाल
🌸 क्या है रंगमंच ❓
– गोविंद पाल
[अध्यक्ष, मुक्तकंठ साहित्य समिति भिलाई छत्तीसगढ़]
एक यक्ष प्रश्न
हृदय के किसी कोने में
एक टीस सी पैदा कर रही है
क्या है रंगमंच ?
मैं असमंजस सा
दिल की गहराई में उतरकर
मन की अंधेरे कोने को
टटोलता हूँ
फिर एक बोध का दीपक जलाकर
उत्तर खोजता हूँ’
क्या है रंगमंच ?
रंगमंच
विचारों के द्वंद को साथ लेकर
अभिव्यक्ति की पंख फैलाकर
उड़ान भरती है,
जीवन के धुंध
और असमंजस से
बाहर निकालने के लिए
आनंद की अनुभूति देती है
रंगमंच!
रीढ़ की हड्डी को सीधा रखने
सुर-ताल – लय
और स्वाभिमान का
उच्छ्वास है रंगमंच,
दृष्टांत की छाती चीरकर
चेतनाओं की कारीगरी से
जब रंगमंच पर उतरती
कलाकारों की नित्य नई शैली
तब अंदर दबी हुई
ज्वालामुखी से
फूट पड़ती है गरम लावा
और उस रक्ताभ लावे की
तपिश से
जलकर खाक हो जाती है
हमारी समस्त आंतरिक
और बाहरी अहंकार,
अंत में इसकी परिणति
राजनैतिक संस्पर्श में आकर
अस्थिर होकर
किसी अनजान अंधेरे की
कालकोठरी में जीवन व्यतीत
करने को मजबूर हो जाती है
हमारे रंगमंचीय आकांक्षाएं।
फिर भी निरंतरता खोज जारी है
उस टीस के प्रभाव को
कम करने
आज भी उत्सुक हूँ
यह जानने के लिए
क्या है रंगमंच❓
•संपर्क –
•75871 68903
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chhattisgarhaaspaas
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