विशेष अवसर पर कविता : आशा झा [दुर्ग छत्तीसगढ़]
🌸 महर्षि परशुराम
श्री परशुराम भगवान विष्णु के छठवे अवतार ‘ ।
जन्मदिन पर मनाते हम अक्षय तृतीया का त्योहार ।
विधि विधान से निकालते हम शोभायात्रा ।
हिंदु धर्म की मान्यता माने चिरंजीवी देवता ।
माता रेणुका ऋषि जमदग्नि का लाला
ब्राम्हण कुल मे जन्मा गुण क्षत्रियो का पाला ‘ ।
पिताज्ञा मान निज माता का वध किया
पाप दूर करने शिवशंकर का ध्यान किया ‘ ।
शिवशंकर ने खुश होकर परशु को फरसा दिपा ।
चरमसीमा पर जब पहुंच गया सहस्त्रार्जुन का अत्याचार ।
श्री परशुराम ने धरा क्षत्रियविहीन किया इक्कीस बार ।
आवेशावतार पहुंचे शिवशंकर के द्वार
श्रीगणेश ने रोका मिलने से बारंबार ।
क्रोधित हो फरसे से एक दांत तोड़ दिया ।
दुनियां ने श्रीगणेश को एकदंत नाम दिया ।
न्याय देवता कहलाते तबसे आवेशावतार ‘
झूठ बोलकर कर्ण ने परशु राम से विद्या ली ।
श्राप दे परशुराम ने जरूरत के समय भुला दी।
सीता स्वयंबर के समय मिले श्रीराम
लक्षमण से कोधित हो गये परशुराम
त्रेता मेंश्रीराम ने शांत कर सुदर्शन चक्र दिया
द्वापर में परशुराम ने श्रीकृष्ण के सुपुर्द किया
श्री बिष्णु जी के छठवे अवतार बनकर आये जहां में आवेशावतार
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🌸 अक्षय तृतीया
परशुराम जी का जन्म हो
मां गंगा का अवतरण हो
उसे अक्षय तृतीया कहते है ‘ । 1
कोई भी शुभ काम हम
निश्चिंत हो इस दिन करे
बहुमूल्य वस्तु आज के
दिन हम सब खरीदा करे
बैशाख मास शुक्ल पक्ष तृतीया
उसे अक्षय तृतीया कहते है।
जिस तिथि के दिन से
त्रेता युग का शुभांरभ हुआ ।
जिस तिथि के दिन
नरनारायण का प्रार्दुभाव हुआ ।
जिस तिथि को श्रीकृष्ण
सुदामा का मिलन हुआ
उसे अक्षय तृतीया कहते हैं ।
सदकर्म जो हम आज करते
उसका कभी न क्षय हुआ ।
पुण्य फल जो प्राप्त करते
उसका कभी न क्षय हुआ ।
जिस तिथि में माता अन्नपूर्णा
का जन्म हुआ ।
उसे अक्षय तृतीया कहते है।
श्री विग्रह चरणो का दर्शन
आज के दिन जो करे ।
बांके बिहारी उसकी सभी
मनोकामनाये पूरी करे।
जिस तिथि मे कुबेर ने
अकूत खजाने का राज जाना
उसे अक्षय तृतीया कहते है ।
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chhattisgarhaaspaas
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