नशामुक्त हो हमर छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ी मुक्तक
3 years ago
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•डॉ.दीक्षा चौबे
[ दुर्ग छत्तीसगढ़ ]
नशा नाश के द्वार हे , करथे सत्यानाश ।
तन हो जाथे खोखला , बीमारी के वास ।
अभी बखत हे आ लहुट , बाबू एला छोड़ ।
तोरे उमर बढ़ाय बर , दाई करय उपास ।।
फुलवा महुवा के झरे , तरिया नदिया पार ।
संझौती के बेर मा , तुलसी म दिया बार ।
बड़भागी तैं पाय हस , ए मानुष के देह ।
दारू भरे गिलास मा , जिनगी ला झन ढार ।।
बेचागे जम्मो जिनिस , परिया होगे खेत ।
जुआ नशा के धार मा , जिनगी ल झन रेत ।
डउकी लइका भूख मा , रोवत कल्पत सोय ।
बांचहि घर परिवार हा , बेरा राहत चेत ।।
गुटका खा-खा देत हस , कैंसर ला तन दान ।
नाश दाँत मुँह के करय , गोठ बैद के मान ।
पारत हस तैं नेवता , रोग शोक जंजाल ।
थोड़ देर के मौज बर , देहू झन जी जान ।।
•संपर्क –
•94241 32349
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chhattisgarhaaspaas
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