अवसर विशेष कविता : आशा झा [दुर्ग छत्तीसगढ़]
▪️ पत्रकार
सांस्कृतिक सामाजिक आध्यात्मिक
मुद्दो पर लड़ने में ‘ ।
कभी पीछे नही रहता
आवाज उठाने में ‘ ।
जनता से भी जो करता रहता तकरार 3से ही हम कहते पत्रकार ‘ ।
जीवन की भागदौड़ में सबकुछ भूलकर ‘ ।
अपने व्यक्तिगत स्वार्थ को त्यागकर ।
लेखनी को ही अपनी बनाता आधार’
उसे ही हम कहते पत्रकार ।
जीवन में कभी भी
अवकाश न लेता जो ‘ ।
अंधेरे मे भी
दिये की तरह जलता जो ‘ ।
जीवन दांव पर लगाता जो बारंबार ‘
उसे ही हम कहते पत्रकार ।
सच्चाई जनता के सामने
लाकर रख देता ।
आंतकियो राजनीतिज्ञो उद्योगपतियो से खुलकर कह देता ‘ ।
चाहे तो कलम से विकास लिख दे
चाहे तो मचा दे हाहाकार ‘ ।
उसे ही हम कहते पत्रकार ।
पर आजकल
पत्रकारो मे भी होते अपवाद ‘ ।
जो सच और झूठ की नही करते फरियाद ।
बिक जाते पैसो में
सुनते नही अंतर्रात्मा की आवाज ।
करने लग जाते भ्रष्टाचार का आगाज
देते नही धमकी देने वालो को जवाब
ऐसे व्यक्ति नही हो सकते पत्रकार ।
प्रिरे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से
जो करने रहते जनता पर उपकार
उसे ही हम कहते पजकार ।
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▪️ मजदूर
दाल चावल पैसा कुछ भी मुफ्त न दो
मजदूर को तुम मजदूर ही रहने दो ।
मजदूर होने की अपनी एक गरिमा
कोई न कह सके मजदूर की महिमा
आसमां मे मत उड़ाओ जमीन पर रहने दो ।
मजदूर को तुम मजदूर ही रहने दो ‘ ।
मजदूर होने से संतोष उसके घर आता
हर हाल मे जीने की ताकत वह पाता
धरती का बिछौना आसमां की चादर ओढ़ने दो ।
मजदूर को तुम मजदूर रहने दो ।
आज की नही फिकर कल की चिंता करता ‘ |
बूंद बूंद श्रम से वह गागर भरता ।
उसे शनैः शनैः धनवान बनने दो
मजदूर को तुम मजदूर ही रहने दो ।
इस प्रक्रिया से वह धन का महत्व समझेगा ।
कभी भी किसी भी तरह धन का अपव्यय नही करेगा ।
तिजोरी में नही तुम उसे गुल्लक में बचत करने दो ‘ ।
मजदूर को तुम मजदूर ही रहने दो ‘ ।
संसार में सभी मजदूर बनकर ही आते
मजदूरी के अलग अलग रूपो को पाते ।
सभी की एक ही प्रजाति रहने दो ‘ मजदूर को तुम मजदूर ही रहने दो ।
किस्मत से जिसको मिलता वह मिलने . का सुख न जाने ।
वह दुनियां में सभी से अपने को ऊंचा माने ‘ ।
बिना श्रम के कोई काम उसका न बनने दो ‘ ।
मजदूर को तुम मजदूर ही रहने दो ।
हे ईश्वर हमें सदा श्रम की मजदूरी देना
एक दूजे से अपना सुख दुख कहने देना ।
सजने दो चौपाल सभी को एकजुट रहने दो ।
मजदूर को तुम मजदूर ही रहने दो ।
सदभावना रखे प्यार एक दूजे पर लुटाये ‘ ।
जीवन में सभी चीजे एक एक कर जुटाये ।
धीरे धीरे घर सुख सुविधाओं से भरने दो ।
. मजदूर को तुम मजदूर ही रहने दो।
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•संपर्क –
•96305 19160
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chhattisgarhaaspaas
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