कविता आसपास : डॉ. अंजना श्रीवास्तव [भिलाई, जिला – दुर्ग, छत्तीसगढ़]
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🌸 मौत का खाका
चौबीस घंटे भी अब बहुत बड़े लगने लगे हैं ।
समय अब काटे नही कट रहा है ।
क्या करें ? चलो ,चलो मौत का खाका बनाये
खाकेनुसार मौत हो तो दिलको सुकून मिलेगा ।
दादाजी ने खाका बनाया मूल स्थान पर मृत्यु ।
दादी बोली मैं संसार से सुहागन चली जाऊँ ।
माँ बोली नाती पोते की शादी देख लूँ ।
पिताजी बोले ईश्वर नाम लेते लेते मरूं ।
दोस्त ने कहा हंसते हंसते दम निकल जाये ।
मैं बोली.. मुझे साइलेंट हार्ट अटैक हो जाए।
दादा जी जीत गए, मां भी जीत गई ।
दोस्त हंस-हंसकर इंतजार कर रहे है ।
मैं साइलेंट हार्ट अटैक के इंतजार मे हूँ ।
मैं आशा वान हूं…… मैं आशा वान हूं।
•संपर्क –
•99819 23250
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chhattisgarhaaspaas
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