5 जून पर्यावरण दिवस पर विशेष रचना : दिलशाद सैफी
•हाँ मैं हूँ पेड़
हाँ मैं पेड़ हूँ….!
विशाल बाहे फैलाये हुए
करती स्वागत
तुम्हारा मुस्कुरा कर…..,,
देती जीवन दान तुम्हें,
प्राण वायु बन
मेरी हजारो लताएं….,,,
लहराती तो कभी
बलखाती तुम्हारे इन
नैंनो को रह रह कर
तृप्त करती….,,,
तुम्हारा मन हर लेती है
सुशोभित सुरभित
पुष्प वाटिकाएं आकर्षित
आह्लादित करती है…,,
जीवन में नवरंग भर देती हैं
विशाल द्रुमदल
कतार बद्ध शोभायमान
आच्छादित करती
इन पर्वत श्रृंखलाएँ को
सजाती धरती को
दुल्हन सा श्रृंगार करती….,,,
धूप में जलते
तन को छाँव देती
राह चलते पथिक को
दो पल विश्राम देती….,,
थूप, वर्षा, ओले
तुफान सह-सह कर भी
ये विशाल
ह्रदय वाले हम वृक्ष ही तो हैं
जो तुम सबको
सुगंधित पुष्प ,मीठे फलों का
दान देती है …।
फिर क्यों तुम हमें काटते हो
नोचते,जलाते हो
इतनी निष्ठुरता किसलिए
जबकि जानते हो
जीवन मिलता हमी से है
तो आओ रोको
टोको मत कटने दो हमें
तुम हमसे
हम तुमसे है जब जीवित।
•संपर्क –
•62678 61179
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chhattisgarhaaspaas
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