कविता आसपास : उज्ज्वल पांडेय [धनबाद झारखंड]
3 years ago
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•शातिर कॉरपोरेट
वे आए
और पत्थर काट कर ले गए
हमारे झारखंड से
कोयला ले गए
अभ्रक ले गए
बॉक्साइट ले गए
ग्रेफाईट ले गए
मैंगनीज ले गए
चूना ले गए
तांबा ले गए
लोहा ले गए
टीन ले गए
सोना ले गए
चाँदी ले गए
जंगल और ज़मीन जाती रही है
सदियों से
वे अब भी ले जा रहे हैं
यहाँ की नदी.. झील.. झरने..
वे सब ले जा रहे हैं
पता नहीं कहाँ
मगर सब कुछ जा रहा है
अपने झारखंड से
क़तार-दर-क़तार
हवाई जहाजों में
मालगाड़ियों में
ट्रक और डंपर में लाद कर झारखंड को
वे ले जा रहे हैं
धीरे-धीरे कुछ भी नहीं बचेगा यहाँ
जैसे चोर
सभी माल को निपटाने के पश्चात
एक छोटे से बैग में बचा-खुचा भी दबा ले जाता है
ठीक वैसे ही
वे भी दबाए ले जा रहे हैं
आदिवासियत को
हमारी अज़ीम सभ्यता को
लेदर के ब्रीफकेश में
वे कौन ?
साले कॉरपोरेट ?
नहीं.. नहीं..
साले नहीं
शातिर कॉरपोरेट।
•संपर्क –
•82826 27135
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chhattisgarhaaspaas
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