






हिंदी ग़ज़ल : बलदाऊ राम साहू [दुर्ग छत्तीसगढ़]

2 years ago
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•जितने ताने – बाने थे सब तज के जाना है
जितने ताने-बाने थे सब तज के जाना है,
तीन हाथ की धरती ही तो एक ठिकाना है।
जब तुम आए, हुआ तुम्हारा स्वागत अभिनंदन
करनी है अंतिम यात्रा तब रोना-गाना है।
मंदिर-मस्जिद भजते थे बस बिन जाने- बूझे,
अपने खाते आया कितना उन्हें बताना है।
बस उसकी चलती है भाई क्या जाड़ा गरमी
अपनी जो रिश्तेदारी है उसे निभाना है।
जीवन भर बस गुणा-भाग औ’ जोड़-घटाना था,
उनका अपने लेखे-जोखे का पैमाना है।
अपने हाथों की रेखाएँ कुछ तो कहतीं थीं,
कितना खोया-पाया वही हिसाब पुराना है।
अंत समय में जाना हमने कर्ज बहुत बाकी है
जाने कैसे हमको किस विधि कर्ज चुकाना है।
आँखें हैं भयभीत, देह भी काँप रही थर-थर,
चिड़िया चुग गई खेत हमें तो बस पछताना है।
•संपर्क –
•94076 50458
chhattisgarhaaspaas
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