कविता : कहाँ गे वो दिन – डॉ. दीनदयाल दिल्लीवार [अनुवादक दुर्गा प्रसाद पारकर]
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सुरता आथे घेरी बेरी वो गाँव के जमाना
वो पहाटिया के अलगोजवा,वो नाचा गाना |
संझा चौपाल म बेफिकर होके मनखे मन
मिटाथे दिन भर के थकान करके गाना बजाना |
खार म लहरावत डोली धनहा के हरियर पाना
वोला देख के किसान मनके रहि रहि के मुस्कराना |
घठौंदा म जावत कुलकत नोनी मन के टोली
मयारू करा आए रिहिन पानी पीए के बहाना |
संझौती बेरा घर लहुटत गाय मन के घंटी
महतारी ल अगोरत बछरू मन के रम्भाना |
मुंह जम्हावत शायद लोगन मन काहत होंही
गुजर गे वो दिन ,गुजर गे वो जमाना |
•संपर्क –
•79995 16642
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chhattisgarhaaspaas
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