कविता आसपास : नारी शक्ति वंदन – गोविंद पाल [ भिलाई छत्तीसगढ़ ]
नारी शक्ति वंदन
नारी!
तुमने कभी हारना नहीं सीखा,
ये पुरुष प्रधान समाज
अपनी कमजोरी छुपाने के लिए
तुम पर हमेशा तोहमत लगाते हैं,
हो सकता है
कुरीतियों की बेड़ियों में जकड़कर
तुम्हें चारदीवारी में कैद कर दे,
हो सकता है
दहेज की लालची भेड़िये
तुम पर अत्याचार करे
तुम पर दबाव डाले
चरित्रहीनता का लांछन लगाये,
पर उनकी चाल में आकर
मत करना आत्मसमर्पण
क्योंकि ये जीवन बहुत अनमोल है
तुम्हारी एक गलत कदम
तुम्हारी आत्महत्या से
वे अपनी जीत की खुशियां मनाएंगे
तुम्हारी चिता की राख
ठंडी होते न होते ही
ये पुरुष!
फिर किसी नारी को बांदी बना लेंगे,
तुम्हारी आत्मबलिदान को पल में
धुंआ में उड़ा देंगे।
इसलिए नारी तुम हारना नहीं
तुम्हारे अंदर दबी दैवीय शक्ति के दीपक को बुझने मत देना
आज नारी शक्तियों के स्वर्णिम युग है,
वो देखो! तुम्हारी हर मनोकामना को
पूरा करने के लिए
तुम्हारी सपनों की स्वतंत्र उड़ान को
पंख देने के लिए
एक गरीब चाय वाला
अपने पुरुषार्थ से
उस उंचाई तक पहुंच गया है
जहाँ से तुम्हें आह्वान कर रहा है आओ नारी!
चारदीवारी के बंधन से
मुक्त होकर बाहर आओ!
आओ! मैं तुम्हारी हर आकांक्षाओं के
पंख बनने के लिए तैयार हूँ
हमेशा तुम्हारे साथ खड़ा हूं।
तीन तलाक और हलाला जैसे
अभिशप्त जिंदगी से
तुम आज मुक्त हो चुकी हो,
घर के चुल्हे चौकियों की धुएं से
आज तुम्हें निजात मिला चुका है,
हमें पता है तुम्हारी शिक्षा से
एक पूरी पीढ़ी शिक्षित हो जाती है
इसलिए बेटियों को पढ़ने पर
हमने बल दिया
समाज के हर क्षेत्र में तुम्हारी भागीदारी सुनिश्चित हो
तुम्हारी सशक्तिकरण से ही
देश सशक्त होता है
उसी कड़ी में
आज एक कदम आगे बढ़कर
नारी शक्ति वंदन की ओर बढ़ रहे हैं,
मेरी माताओं, बहनों, बेटियों!
कोई तुम्हारे साथ खड़ा हो या हो
ये गरीब चाय वाला
हमेशा तुम्हारे साथ खड़ा रहेगा।
• कवि संपर्क –
• 75871 68903
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chhattisgarhaaspaas
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