पर्व विशेष रचना – गीता जुन्ज़ानी
2 years ago
305
0
▪️ विजयदशमी
विजयदशमी पर्व विजय का
रावण शिव का परम भक्त था
और बहुत था ज्ञानी
दस शीश और बीस भुजाओं
का वह था स्वामी
नहीं किसी की सुनता था वह
करता था मनमानी
परस्त्री के लोभ में जिसने
गढ़ी एक नई कहानी
रावण के जब बढ़े अत्याचार
राम ने दिया उसे मार
बता दिया जग को उन्होंने
जीते हमेशा सत्य
विजयदशमी पर्व विजय का
हारा जिसमें झूठ
छल करता हो कोई कितना जीते हमेशा वीर
[ • कवयित्री गीता जुन्ज़ानी दिल्ली पब्लिक स्कूल भिलाई में प्रधानाध्यापिका जुनियर विंग के पद पर पदस्थ हैं. ]
🟥🟥🟥🟥🟥
chhattisgarhaaspaas
विज्ञापन (Advertisement)