• poetry
  • गीत, सूरज नया उगाना है- बलदाऊ राम साहू

गीत, सूरज नया उगाना है- बलदाऊ राम साहू

4 years ago
263

सूरज नया उगाना है

नया युग है सूरज हमको
नया उगाना है
पथ से जो भटके हैं राही
राह दिखाना है ।

आराम नहीं प्रतिपल हमको
चलते रहना है
गहन अंधेरा है, दीपों-सा
जलते रहना है
खोने को कुछ भी नहीं है
केवल पाना है।

सुख-दुख की घड़ियों में आँखें
नम हो जाती हैं
भीतर में जो बर्फ जमी है
गल-गल जाती है।
मन के भीतर भाव नया अब
हमें जगाना है ।

आएँगे अब लोग साथ में
आगे बढ़ने को
जो भी अब अनगढ़ी वस्तु हैं
उनको गढ़ने को
मेहनत करके इस जीवन को
नया बनाना है।

●कवि संपर्क-
●94076 50458

विज्ञापन (Advertisement)

ब्रेकिंग न्यूज़

कविता

कहानी

लेख

राजनीति न्यूज़