कवि और कविता : शिवमंगल सिंह
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उन शब्दों को खोज रहा हूँ
▪️ एक
उन शब्दों को खोज रहा हूँ
जिनके सहारे
इस असीम अंधकार के विरुद्ध
शब्द चमक जाय
नव प्रकाश की किरणें बनकर
दुनिया भर में
फैल जाय उजाला।
▪️ दो
उन शब्दों को खोज रहा हूँ
जिनके सहारे
दुनिया भर में
हिंसा और नफरत
कम होते- होते
तब्दील हो जाये
अंहिसा और प्रेम के रूप में
दुनिया भर में फैल जाये
सूख -शांति की किरणें
हिंसा और नफरत से
मुक्त हो जाये
यह दुनिया ।
▪️ तीन
उन शब्दों को खोज रहा हूँ
जिनके सहारे
दुनिया भर में फैले
अन्याय और शोषण से मुक्त
समाज जाये
दुनिया भर में।
▪️ चार
शब्द
संवाहक होते हैं
अभिव्यक्ति के लिए
विचारों के संप्रेषण के लिए
उपरोक्त कामना को
पूर्ण करने के लिए
दुनिया भर के
कोन से शब्द कोष मिलेगें
एसे शब्द ?
ऐसे शब्द ?
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शब्द गाथा
▪️ एक
इस दुनिया में
ध्वनि के माध्यम से
लिपि के माध्यम से
कब अवतरित हुए थे
शब्द ?
अब यह प्रमाणित करना
असंभव नहीं लगता है
लेकिन इस काल चक्र से
युगों – युगों से
तमाम शब्दों की प्रासंगिकता बनी हुई है
अटल चट्टान की तरह
इतिहास के पन्नों में सीमट गये
कालचक्र में समाहित हो गये
दुनिया भर के
असंख्य राजवंश
किन्तु, अपनी उत्तपत्ति से लेकर
इस वर्तमान युग तक
इस बीच न जाने कितनी
शताब्दियाँ गुजर गयी
लेकिन शब्द
आज भी और आगे भी खड़ें रहेंगे
ज्यों के त्यों।
▪️ दो
दुनिया भर के तमाम
महाकवियों और दार्शनिकों ने
विभिन्न विषयों के विचारकों के द्वारा
लिखित ग्रंथों की उद्भावना
शब्दों के माध्यम से
समाज के लिए
प्रकाश बिखर रहे
पथ प्रदर्शन कर रहे।
▪️ तीन
अब यह दुनिया
विकास के चरमोत्कर्ष पर
किन्तु, यदि हमारे आदि मानव
शब्दों को गढे नहीं होते
विभिन्न प्रकार के
लिपियों के निर्माण नहीं किये होते
हम लोग आज भी
आदिमानव के तरह ही होते।
▪️ चार
दुनिया भर के
शब्दकोश में
सभी प्रकार के शब्द है
ये फूल भी है
शुल भी है
कोमल भी है
कठोर भी है
जिस रूप में भी
इसे अभिव्यक्त करना चाहते हैं
उसी तरह के शब्द
उत्तर आयेंगे
आप के जुबान पर।
•••
[ प्रगतिशील कवि शिवमंगल सिंह छत्तीसगढ़ भिलाई से हैं. ‘छत्तीसगढ़ आसपास’ में इनकी पहली रचना. •संपर्क-87709 50984 ]
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chhattisgarhaaspaas
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