‘छत्तीसगढ़ आसपास’ के संपादक व कवि प्रदीप भट्टाचार्य के हिंदी प्रगतिशील कविता ‘दम्भ’ का बांग्ला रूपांतर देश की लोकप्रिय बांग्ला पत्रिका ‘मध्यबलय’ के अंक-56 में प्रकाशित : हिंदी से बांग्ला अनुवाद कवि गोविंद पाल ने किया : ‘मध्यबलय’ के संपादक हैं बांग्ला-हिंदी के साहित्यकार दुलाल समाद्दार
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कविता : दम्भ – प्रदीप भट्टाचार्य
बांग्ला अनुवाद गोविंद पाल
एक दीर्घकाय
विशाल बरगद का पेड़
प्रतिष्ठित है
अंध विश्ववासों द्वारा
जाल का झंझावात है
भगवान से भी उपर उठने का दम्भ
जननी की कोख से
जड़ों को खींच
उचक कर आकाश
छूने की तमन्ना है
अपनी सूची
विकलांग टहनियों से
अपरिचित
सड़े-गले पत्तों से अंजान
अपनी ऊँचाई नापता
वह मूढ़
अंघड़
आँधी से
बेखौफ
जूझना चाहता है
ये आँखे कस-मसाती हुई
और
हवाओं के नुकीले
तीर से
कल क्षत-विक्षत होगा.
संपर्क-
94241 16987
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chhattisgarhaaspaas
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