कविता आसपास : तारकनाथ चौधुरी
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काश ऐसा होता
– तारकनाथ चौधुरी
[ भिलाई चरोदा- छत्तीसगढ़ ]

बारिश की बूँदो का
जादुई असर क़ब्र में सोये दानों में
जान फूँक देता है…
लूले से लगने वाले
दरख्तों को दे देता है हजा़र हाथ
और गर्म रेत पर सूखी पडी़ दरिया को
दे देता है रवानी।
सबके लिए अलग – अलग सी
कहानियाँ लिख जाती है –
हर बरस बारिश
मगर मैं खुश होता हूँ
सिर्फ़ इसलिए कि
बेखौफ़ मिटा देती है बारिश-
दीवारों पे लिखी उन तहरीरों को
जो दीवारें खडी़ करती हैं
इंसा-इंसा के बीच
ज़हर उगलता है जिसका हर्फ़-हर्फ़
खौफ़ज़दा मैं जिन्हें
कभी मिटा न सकता।
काश कि कभी ऐसा होता-
भीगकर लौटता जब घर को
तो मिटा हुआ पाता
तक़दीर का लिक्खा हुआ।
• कवि संपर्क-
• 83494 08210
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chhattisgarhaaspaas
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