‘ऑपेरशन सिंदूर’ पर विशेष कविता : युद्ध के आसार- दशरथ सिंह भुवाल सोनपांडर
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युद्ध के आसार

सिंदूर की कीमत कभी तुम,
क्या जानों पाकिस्तानी।
मासूमों पर चला गोलियाॅं,
बिखेरे ख़ून की लाली।।
कूटनीतिक हमले में बंद,
हो गई बोलती बानी।
सूख गयी भरी नदियाॅं सभी,
उतर गया तेरा पानी।।
युद्ध शुरु हुआ आगे लेगी,
भारत माता कुर्बानी।
छठी का दूध और तुम्हें अब,
याद आएगी भी नानी।।
देख रही है दुनिया सारी,
ख़ूब मजहबी मनमानी।
ज़रा शर्म से डूब मरो अब,
तुम होकर पानी-पानी।।
हिन्दुस्तान के ही भरोसे,
चेहरे पर थी लालामी।
रह जाओगे सदा तरसते,
नहीं मिलेगा जब पानी।।
तबाह कर दिए मिनटों में,
सब आतंकी रजधानी।
बड़े धैर्य से माॅं भारत के,
जंग बहादुर सेनानी।।
अपने अंदर झाॅंक के देख,
कितनी भरी है नाकामी।
मुल्क तुम्हारा रो रहा जहाॅं,
देख तुम्हारी नादानी।।
माॅंग रहे हो भीख अरु युद्ध,
की बोल रहे हो वाणी।
परत-परत खुल रही सब पोल,
छुपी नहीं कारस्तानी।।
• संपर्क-
• 98271 90993
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chhattisgarhaaspaas
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