साहित्यिक पत्रिका कवितायन में छत्तीसगढ़ [चरोदा-जिला दुर्ग] के सेवानिवृत्त व्याख्याता तारक नाथ चौधुरी
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जीवन यात्रा

भूमिष्ठ होते ही
चल पडी़ थी
मेरे जीवन की रेल
शयनायनयुक्त,वातानुकूलित
सर्वसुविधासज्जित नहीं बल्कि
साधारण यात्री गाडी़ पर ही
ठूँस दिया गया था मुझे
रोते-बिलखते देखकर
कुछ ने दुलारा मुझे
किलकारियाँ सुनकर
अपनी गोद में बिठाया भी
और भीतर ही भीतर
मैं समझने लगा-
स्नेह,ममता और सहयोग
मिल जाये तो
यात्रा सहज हो जाती है।
अब भी सवार हुँ मैं
जीवनरुपी रेल में
जहाँ थमेगी
कुछ सहयोगी हाथ
मुझे उतारकर अलविदा कह देंगे।
• कवि संपर्क-
• 83494 08210
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chhattisgarhaaspaas
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