बचपन आसपास
5 years ago
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●बसन्त के स्वागत में
-डॉ. बलदाऊ राम साहू
भँवरों का है गुंजार सखी
बासंती रंग, बयार सखी.
महुआ गंध बिखेर रहा है
कर के सोलह श्रृंगार सखी.
सेमल फूल अगास खिले हैं
है तारों का जैसे हार सखी.
बसंत आगत के स्वागत में
तत्पर करने सत्कार सखी.
चंचल मन हैं ग्राम्य बाला
मन है जिनका उदार सखी.
कोयल गाती राग मनोहर,
अंग अंग छलके प्यार सखी.
मन को झंकृत कर रहा हैं
होरी का यह त्यौहार सखी.

●लेखक संपर्क-
●94076 50458
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chhattisgarhaaspaas
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